वाराणसी। भोजपुरी लोकगायन और बिरहा जगत के सम्राट रहे हीरालाल यादव की सातवीं पुण्यतिथि उनके आवास पर श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाई गई। इस अवसर पर पूर्वांचल के नामचीन बिरहा कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति देकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में लोकगीत, बिरहा गायन एवं उनके व्यक्तित्व-कृतित्व पर चर्चा का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत पद्मश्री हीरालाल यादव के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देने के साथ हुई। उपस्थित कलाकारों एवं गणमान्य लोगों ने उन्हें काशी की लोकसंस्कृति का गौरव बताते हुए उनके योगदान को याद किया।
समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सुजीत यादव ‘लक्कड़ पहलवान’ ने कहा कि हीरालाल यादव काशी की माटी के सच्चे लाल थे। उन्होंने बिरहा कला को देश ही नहीं बल्कि सात समुंदर पार तक पहचान दिलाई। डॉ. दुर्गा प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि हीरालाल यादव काशी की सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक थे और साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के विचारों से प्रभावित रहे।
इस दौरान डॉ. जयशंकर ने बिरहा की पंक्तियां सुनाकर माहौल को भावुक कर दिया। कार्यक्रम में कलाकारों ने पारंपरिक बिरहा गायन प्रस्तुत कर देर रात तक श्रोताओं का मनोरंजन किया।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से संजय यादव ‘भाई जी’, डॉ. हीरालाल, कॉमरेड बल्लू राम, धनु भगत, मन्नालाल, जवाहर, जेपी, नीरज राय, आनंद सिंह, नित्यानंद चौबे, राजेश यादव, विनय राय, अनु सिंह, गुड्डू यादव, दीपक यादव, अमित यादव, राजू सिंह सहित पूर्वांचल के अनेक बिरहा कलाकार एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
पद्मश्री हीरालाल यादव की सातवीं पुण्यतिथि पर सजी बिरहा की महफिल
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