ओबरा (सोनभद्र) ऊर्जा की राजधानी के रूप में विख्यात ओबरा और इसके आसपास के क्षेत्रों में इन दिनों पत्रकारिता की आड़ में वसूली का एक काला खेल पनप रहा है। कुछ रसूखदार और फर्जी तत्वों ने पत्रकारिता जैसे पवित्र और सम्मानित पेशे को अपनी अवैध कमाई का जरिया बना लिया है। क्षेत्र के बालू खनन पट्टों और प्रतिबंधित क्षेत्रों में सक्रिय ये फर्जी पत्रकार न केवल असली और ईमानदार पत्रकारों की छवि को धूमिल कर रहे हैं, बल्कि शासन-प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर अवैध उगाही के सिंडिकेट को बढ़ावा दे रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, ओबरा और सोन नदी के तटीय बालू खनन क्षेत्रों में इन दिनों कुछ ऐसे तत्व सक्रिय हैं, जिनके पास न तो किसी मान्यता प्राप्त संस्थान का पहचान पत्र है और न ही पत्रकारिता का कोई अनुभव। ये लोग गाड़ियों पर प्रेस या पत्रकार लिखवाकर अवैध रूप से संचालित हो रहे खनन क्षेत्रों या ओवरलोडिंग वाले रास्तों पर मंडराते रहते हैं। खनन से जुड़े नियमों की कमियों का फायदा उठाकर ये फर्जी तत्व पट्टाधारकों और वाहन स्वामियों पर धौंस जमाते हैं और खबर छापने या उच्चाधिकारियों से शिकायत करने के नाम पर मोटी रकम की वसूली करते हैं। इस अवैध खेल का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इन फर्जी पत्रकारों की हरकतों की वजह से अब खनन माफिया को भी असली पत्रकारों पर उंगली उठाने का मौका मिल गया है। कुछ खनन संचालक इन फर्जी तत्वों को अपनी ढाल बना रहे हैं। वे इन्हें निश्चित महीना या सुविधा शुल्क देकर अपने अवैध काले कारनामों को दबाने का काम कर रहे हैं। इस अपवित्र गठबंधन के कारण जहां एक ओर सरकार को राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी ओर जो पत्रकार पूरी ईमानदारी और निष्पक्षता से खनन माफिया के खिलाफ खबरें लिखना चाहते हैं, उन्हें भी इसी जमात का हिस्सा समझकर बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। ओबरा और समूचे सोनभद्र जिले के वरिष्ठ और मान्यता प्राप्त पत्रकारों ने इस प्रवृत्ति पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। स्थानीय पत्रकार संगठनों का कहना है कि पीत पत्रकारिता और ब्लैकमेलिंग करने वाले ये लोग समाज के दुश्मन हैं। प्रबुद्ध पत्रकारों और संगठनों ने जिला प्रशासन, खनन विभाग और पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि क्षेत्र में सक्रिय ऐसे संदिग्ध प्रेस बोर्ड लगी गाड़ियों और फर्जी आईडी कार्ड धारकों की सघन चेकिंग की जाए।
अंदरूनी सूत्रों की मानें तो स्थानीय सूचना विभाग और पुलिस प्रशासन के रडार पर ऐसे कई तथाकथित पत्रकार आ चुके हैं। इनके खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं और बहुत जल्द इस रैकेट से जुड़े चेहरों का नाम सहित बड़ा पर्दाफाश होने वाला है।लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को चंद पैसों के लिए कलंकित करने वाले इन फर्जी पत्रकारों के खिलाफ अब आर-पार की लड़ाई की तैयारी हो चुकी है। प्रशासन की पैनी नजर इन पर बनी हुई है और जल्द ही सलाखों के पीछे इनका असली ठिकाना होगा, जिससे ओबरा के पत्रकार जगत की गरिमा को दोबारा बहाल किया जा सके।
ओबरा में फर्जी पत्रकारों का जाल बालू खनन क्षेत्रों में वसूली का खेल, जल्द होगा बड़ा पर्दाफाश
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