(गाजीपुर),
मुहम्मदाबाद तहसील क्षेत्र के शेरपुर गांव में गंगा नदी का कटाव पिछले कई दशकों से ग्रामीणों और किसानों के लिए गंभीर समस्या बना हुआ है। गांव निवासी एवं पूर्व प्रधान स्व. महेंद्रनाथ राय के पुत्र प्रेमप्रकाश राय ने बताया कि वर्ष 1985 से अब तक गंगा के कटाव में सैकड़ों किसानों की ढाई हजार बीघा से अधिक कृषि योग्य भूमि के साथ-साथ बाग-बगीचे भी नदी में समाहित हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि शेरपुर गांव की करीब दो किलोमीटर कृषि भूमि गंगा की कटान की जद में आ चुकी है। ग्राम पंचायत का पुरवा और शिवराय का पुरवा भी गंगा में विलीन हो चुका है। कटाव के कारण बड़ी संख्या में किसान अपनी कृषि भूमि से वंचित हो गए हैं।
प्रेमप्रकाश राय का आरोप है कि गंगा में समाहित हो चुकी भूमि के बावजूद किसानों को अब तक कोई मुआवजा नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि जिन जमीनों का अस्तित्व ही नहीं रह गया, उनकी भी मालगुजारी किसानों को देनी पड़ रही है। वहीं, नदी में समाहित जमीन से निकली बालू पर भी किसानों का कोई अधिकार या नियंत्रण नहीं है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीणों द्वारा कई बार शासन-प्रशासन का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकृष्ट कराया गया, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो सकी।
ठोकर को आगे बढ़ाने की मांग
प्रेमप्रकाश राय ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि जलालपुर-मुबारकपुर से आगे तक निर्मित ठोकर का विस्तार कराया जाए, ताकि शेरपुर गांव और आसपास की कृषि भूमि को गंगा कटाव से बचाया जा सके। उन्होंने गंगा में विलीन हो चुकी जमीन की मालगुजारी माफ करने और प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की भी मांग की।
उन्होंने क्षेत्र के शहीदों के नाम पर उद्योग-धंधे स्थापित कर स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई।
2022 से ठोकर निर्माण के बाद कुछ राहत
प्रेमप्रकाश राय के अनुसार वर्ष 2022 से ठोकर निर्माण का कार्य शुरू होने के बाद कटाव की गति में कुछ कमी आई है, लेकिन शेरपुर के मुबारकपुर से गहमर घाट की ओर करीब एक किलोमीटर क्षेत्र में अब भी गंगा का कटाव जारी है। उन्होंने मांग की कि ठोकर का निर्माण आगे तक कराया जाए, जिससे शेरपुर सहित आसपास के गांवों और किसानों की जमीन को सुरक्षित किया जा सके।
कटाव की भेंट चढ़ी किसानों की जमीन
प्रेमप्रकाश राय के अनुसार जिन किसानों की भूमि गंगा में समाहित हुई है, उनमें श्याम नारायण राय की 3 बीघा, सियाराम राय की 4 बीघा, ओमप्रकाश राय की 8 बीघा, महिमनारायण राय की 8 बीघा, बंसनारायण राय की 5 बीघा, उपेन्द्रनाथ राय की 12 बीघा, ओमप्रकाश राय उर्फ बच्चन राय की 12 बीघा, काशी यादव की 4 बीघा, बंशी राय की 5 बीघा, ओमप्रकाश राय व नारायण यादव की 18 बीघा, घनश्याम राय की 25 बीघा, विद्यासागर उपाध्याय की 5 बीघा, भोला राय व रामदत्त राय की 5 बीघा, रविंद्र राम की 4 बीघा तथा अमरनाथ राय की 3 बीघा भूमि शामिल है।
इसके अलावा बिनोद राय, सीताराम राय और मंटू राय की पूरी जमीन गंगा में समाहित हो जाने की बात भी बताई गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि गंगा कटाव केवल कृषि भूमि का नुकसान नहीं है, बल्कि इससे गांव की आबादी, बाग-बगीचे और किसानों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है। ऐसे में शासन-प्रशासन से स्थायी कटावरोधी कार्य कराने और प्रभावित किसानों को राहत देने की मांग तेज हो गई है।

