हापुड़ (मनीष कुमार) नाबालिग बच्चों को बहला-फुसलाकर ले जाने और उन्हें खेतों में मजदूरी कराने के लिए बेचने वाले एक संगठित गिरोह का हापुड़ पुलिस ने पर्दाफाश किया है। नगर कोतवाली पुलिस ने गिरोह के चार सदस्यों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से दो अपहृत बालकों को सकुशल बरामद किया है। पुलिस ने आरोपितों के पास से पांच हजार रुपये नकद और तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं।
पुलिस जांच में सामने आया कि शिवगढ़ी निवासी 15 वर्षीय किशोर 17 मई को किसी बात से नाराज होकर घर से साइकिल लेकर निकल गया था। वह सपनावत होते हुए ब्रजघाट पहुंचा, जहां उसकी मुलाकात अमित कुमार नामक युवक से हुई।
किशोर ने भूख लगने की बात कही तो अमित उसे खाना खिलाने के बहाने अपने साथ ले गया। आरोप है कि खाना खाने के बाद किशोर बेहोश हो गया और अगले दिन खुद को एक गांव में पाया।
पीड़ित किशोर ने बताया कि वहां उससे कई दिनों तक खेतों में काम कराया गया। पशुओं के लिए चारा काटने समेत अन्य श्रम कार्य भी उससे कराए गए। इस बीच स्वजन ने नगर कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।
कोतवाली प्रभारी मनीष चौहान के नेतृत्व में गठित पुलिस टीमों ने 100 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी साक्ष्यों और सुरागों के आधार पर पुलिस आरोपितों तक पहुंची। हिरासत में लेकर की गई पूछताछ में गिरोह के पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। पुलिस ने हापुड़ के किशोर के अलावा वाराणसी से बहला-फुसलाकर लाए गए 17 वर्षीय एक अन्य बालक को भी बरामद कर लिया।
क्षेत्राधिकारी वरुण मिश्रा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों की पहचान संभल निवासी अमित कुमार गुप्ता, लखनऊ निवासी दीपक, मुरादाबाद निवासी मुकेश शर्मा तथा अमरोहा निवासी योगेश उर्फ लोकेश के रूप में हुई है। पूछताछ में पता चला कि अमित और दीपक नाबालिग बच्चों को अपने झांसे में लेकर मुकेश और योगेश को 1500 से 5000 रुपये में बेच देते थे। इसके बाद बच्चों से खेतों और पशुपालन से जुड़े कार्य कराए जाते थे।
पुलिस ने चारों आरोपितों को रेलवे यार्ड रोड स्थित नीलकंठ मंदिर के पास से गिरफ्तार किया। उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। साथ ही गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और इससे जुड़े नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।

