मुहम्मदाबाद (गाजीपुर)। नगर क्षेत्र में कराए जा रहे सड़क निर्माण कार्य को लेकर लगाए गए सूचना बोर्ड ने ही जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बोर्ड पर दर्ज विवरण के अनुसार कार्य की लागत 13,34,897.52 रुपये है, जबकि कार्य शुरू होने की तारीख 29 जून 2026 और पूर्ण होने की तारीख 28 जून 2026 अंकित है।
यानी बोर्ड के अनुसार सड़क का निर्माण कार्य शुरू होने के एक दिन पहले ही पूरा हो गया! तारीखों में यह विसंगति स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, यह लिखने की त्रुटि है या विभागीय अभिलेखों में भी यही तारीख दर्ज है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बोर्ड पर कार्य का नाम नगर पालिका परिषद मुहम्मदाबाद, वार्ड संख्या 12/3 में मंगदीप की दुकान से गुलेबाग बस्ती होते हुए काशी बस वाले के घर तक पुनर्निर्माण डामर रोड का कार्य दर्शाया गया है। कार्यदायी संस्था के रूप में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग, गाजीपुर का नाम अंकित है। बोर्ड पर विधानसभा क्षेत्र मुहम्मदाबाद और वित्तीय वर्ष 2026-27 का भी उल्लेख है।
13.34 लाख की लागत, लेकिन तारीखों में उलझा हिसाब…
करीब 13.35 लाख रुपये की लागत वाले सार्वजनिक निर्माण कार्य के सूचना बोर्ड पर कार्य प्रारंभ और पूर्ण होने की तारीख में इस तरह की विसंगति कई सवाल खड़े करती है। आम तौर पर निर्माण कार्यों की पारदर्शिता के लिए लगाए जाने वाले बोर्ड पर कार्य की लागत, अवधि, कार्यदायी संस्था और अन्य महत्वपूर्ण विवरण स्पष्ट रूप से दर्ज किए जाते हैं।
ऐसे में सवाल यह है कि क्या सिर्फ बोर्ड पर तारीख गलत लिखी गई है, या विभागीय रिकॉर्ड में भी यही तारीख दर्ज है? यदि यह महज टाइपिंग या लेखन की गलती है तो जिम्मेदार अधिकारी इसे तत्काल दुरुस्त कराएं, ताकि सरकारी निर्माण कार्य को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति न बने।
जांच हो तो सामने आएगा पूरा सच….
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी धन से होने वाले निर्माण कार्यों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है। निर्माण कार्य की वास्तविक शुरुआत और पूर्णता की तारीख, मौके पर हुए कार्य की स्थिति तथा खर्च की गई धनराशि का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए।
इस मामले में संबंधित विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि कार्य वास्तव में कब शुरू हुआ, कब पूरा हुआ और सूचना बोर्ड पर 29 जून के बाद 28 जून की पूर्णता तिथि कैसे दर्ज हो गई।
फिलहाल तस्वीर में मौजूद सूचना बोर्ड ही सवाल पूछ रहा है और जवाब संबंधित विभाग को देना है। मामला भ्रष्टाचार का है या महज तारीख लिखने में हुई गलती, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

