भावरकोल(गाज़ीपुर )।थाना क्षेत्र के पखनपुरा ग्राम निवासी भारत मां के जांबाज सपूत इश्तियाक खान ने कारगिल युद्ध के दौरान 3 जुलाई 1999 को वीरता से लड़ते हुए दुश्मनों के छक्के छुड़ाते हुए अपने को बलिदान दिया था | इश्तियाक खान अपने 3 भाइयों मे युसूफ खान तथा इम्तियाज़ खान से छोटे थे | इश्तियाक खान वर्ष 1997 में 22 ग्रेनाड़ीयर में भर्ती हुए थे | जबलपुर से हैदराबाद में पोस्टिंग हो गई थी 1999 में शादी के लिए अवकाश लेकर घर आया था | उनकी शादी 10 अप्रैल 1999 में रशीदा बेगम के साथ हुआ था| कारगिल युद्ध के लिए छुट्टियां निरस्त कर वापस बुला लिया गया | उसका बड़ा भाई इम्तियाज भी अपने पोस्टिंग स्थल हैदराबाद पहुंच गए उन्हें कारगिल में भेज दिया गया | कारगिल में युद्ध के दौरान दुश्मनों को मौत के घाट उतार देने के बाद इश्तियाक सदा के लिए भारत मां की गोद में सो गया | शहीद की पार्थिव शरीर 10 जुलाई 1999 को पैतृक गांव पखनपुरा लाया गया था | उनके खानदानी कब्रिस्तान में सुपुर्द -ए – खाक किया गया | इश्तियाक खान के बड़े भाई इम्तियाज़ खान भी सेवा में भर्ती होकर इसी यूनिट में हैदराबाद में ही थे उनकी भी ड्यूटी कारगिल में लगी थी पूर्व सैनिक इम्तियाज खान के पुत्र इंतजार खान आज सेना के 22 ग्रेनेडीयर मे तैनात होकर देश की सेवा में डटे हुए हैं | इश्तियाक के बलिदान के बाद शासन की ओर से गैस एजेंसी सहित अन्य सभी सुविधा का लाभ शहीद की पत्नी रशीद को मिला | शहीद की माता शाहरून्निसा पिता मुहम्मदी खान एवं सबसे बड़े भाई युसूफ खान का निधन हो चुका है छोटा भाई इंतजार की मृत्यु हो चुकी है |
ग्राम पखनपुरा एक मुस्लिम बाहुल्य गांव है इस गांव से आज भी सैकड़ो फौज के रूप में देश की सेवा मे तैनात है
शादी के डेड़ दो माह बाद ही कारगिल शहीद इश्तियाक खान देश के लिए हो गए थे कुर्बान
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