अनपरा/सोनभद्र। अनपरा तापीय परियोजना के आवासीय परिसर स्थित मुख्य डाकघर (पोस्ट ऑफिस) इन दिनों बदहाली के आंसू रो रहा है। पिछले दिनों हुई मूसलाधार बारिश के बाद पोस्ट ऑफिस के मुख्य प्रवेश द्वार पर जलभराव की समस्या ने विकराल रूप ले लिया है। डाकघर के गेट से लेकर मुख्य सड़क की पटरी तक पानी लबालब भर गया है, जिससे यहाँ आने वाले सैकड़ों उपभोक्ताओं और विभागीय कर्मचारियों को परिसर के अंदर दाखिल होने में भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है। विभागीय सूत्रों और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, जिस मुख्य मार्ग से प्रतिदिन बड़ी संख्या में बुजुर्ग, महिलाएं और आम नागरिक अपने जरूरी काम (जैसे रजिस्ट्री, स्पीड पोस्ट, बैंकिंग व पेंशन) के लिए पोस्ट ऑफिस में प्रवेश करते हैं, वह प्रवेश द्वार पूरी तरह से पानी में डूब चुका है। जलभराव के कारण लोगों को गंदे पानी के बीच से ही होकर गुजरना पड़ रहा है। पानी के नीचे सड़क की स्थिति न दिखने के कारण दोपहिया वाहनों के फिसलने और पैदल यात्रियों के चोटिल होने की आशंका लगातार बनी हुई है। यदि स्थिति यही रही, तो इसका सीधा असर डाकघर के दैनिक और आवश्यक सरकारी कार्यों पर भी पड़ सकता है। इस अव्यवस्था को लेकर स्थानीय नागरिकों और उपभोक्ताओं में भारी आक्रोश व्याप्त है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है। हर साल बरसात के मौसम में पोस्ट ऑफिस के गेट पर इसी तरह जलभराव हो जाता है, लेकिन आज तक इस समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं तलाशा गया। सवाल यह उठता है कि जब नगर पंचायत और परियोजना प्रशासन को पहले से पता होता है कि मानसून में यहाँ पानी भरता है, तो समय रहते नालियों की सफाई और मरम्मत कार्य क्यों नहीं कराया जाता। आखिर जिम्मेदार अधिकारियों की इस लापरवाही का खामियाजा आम जनता क्यों भुगते। डाकघर जैसी महत्वपूर्ण सार्वजनिक जगह पर जलभराव की इस गंभीर समस्या को देखते हुए स्थानीय संभ्रांत नागरिकों और उपभोक्ताओं ने संबंधित उच्चाधिकारियों व स्थानीय प्रशासन से पुरजोर मांग की है। लोगों का कहना है कि यहाँ जमे बरसाती पानी की तत्काल निकासी कराई जाए और भविष्य के लिए एक सुदृढ़ जल निकासी (ड्रेनेज सिस्टम) की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्राहकों और कर्मचारियों को आवागमन में सहूलियत हो सके और डाकघर का कार्य बिना किसी बाधा के सुचारु रूप से संचालित होता रहे।
अनपरा बारिश के बाद पोस्ट ऑफिस के मुख्य द्वार पर जलभराव, घुटने भर गंदे पानी से गुजरने को मजबूर उपभोक्ता और कर्मचारी
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