सोनभद्र। जनपद के कोन थाना क्षेत्र से एक आदिवासी परिवार की जमीन पर अवैध कब्जे और दबंगई का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। पीड़ित आदिवासी ने स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन (डीएम) से न्याय की गुहार लगाते-लगाते थकने के बाद अब सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से न्याय की गुहार लगाई है। पीड़ित का आरोप है कि रसूखदारों के दबाव में स्थानीय प्रशासन मामले को दबाए बैठा है। मामला कोन थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम हर्रा का है। यहां के निवासी रामसेवक उर्फ सिपाही (पुत्र रामस्वरूप) को शासन द्वारा नियमानुसार पट्टे की जमीन आवंटित की गई थी। पीड़ित रामसेवक का आरोप है कि गांव के ही कुछ दबंग और भू-माफिया उनकी इस पट्टे की पैतृक जमीन पर गिद्ध दृष्टि गड़ाए हुए थे और हाल ही में उन्होंने इस जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया। पीड़ित रामसेवक ने जब अपनी ही जमीन पर हो रहे इस अवैध निर्माण और कब्जे का कड़ा विरोध किया, तो दबंगों ने मर्यादाओं को ताक पर रखकर उनके साथ जमकर गाली-गलौज की और लाठी-डंडों से मारपीट की। दबंगों द्वारा पीड़ित परिवार को जान से मारने की धमकी भी दी जा रही है।इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन का उदासीन रवैया है। पीड़ित रामसेवक के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित ने सोनभद्र के जिलाधिकारी (डीएम) से मिलकर लिखित शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।पीड़ित ने कोन थाने में भी कई बार प्रार्थना पत्र देकर सुरक्षा और जमीन वापस दिलाने की मांग की, लेकिन पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी रही। कई बार चक्कर काटने के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई प्रभावी कानूनी कार्रवाई नहीं की है। सोनभद्र जिला आदिवासी बहुल क्षेत्र है, जहां भू-माफियाओं द्वारा गरीबों और आदिवासियों की जमीनों को निशाना बनाने के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। पीड़ित रामसेवक उर्फ सिपाही का कहना है कि जब जिले के आला अधिकारियों ने उसकी गुहार नहीं सुनी, तो अब उसने सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर न्याय की मांग की है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री की भू-माफियाओं के खिलाफ चलाई जा रही सख्त नीति पर भरोसा जताते हुए मांग की है कि उसकी पट्टे की जमीन को तत्काल प्रभाव से अवैध कब्जे से मुक्त कराया जाए। आदिवासी परिवार के साथ मारपीट करने वाले और जान से मारने की धमकी देने वाले दबंगों के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की जाए। स्थानीय स्तर पर लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों की जवाबदेही तय हो।अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद सोनभद्र का जिला प्रशासन इस बेबस आदिवासी परिवार को न्याय दिलाने के लिए कब हरकत में आता है।
आदिवासी की पट्टे की जमीन पर भू-माफियाओं का अवैध कब्जा विरोध करने पर मारपीट, न्याय के लिए मुख्यमंत्री के द्वार पहुंचा पीड़ित
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