ओबरा (सोनभद्र) । उत्तर प्रदेश में संपत्तियों के नए मूल्यांकन व सर्किल रेट (नवीन दर सूची) को लेकर ओबरा तहसील एवं उप-निबंधक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालय में अधिवक्ताओं ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। अधिवक्ता संघर्ष समिति के बैनर तले अधिवक्ताओं ने नई एकीकृत दर सूची और नियमों में बदलाव के खिलाफ एकजुट होकर जनपद सोनभद्र के प्रभारी मंत्री को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा।
अधिवक्ताओं का आरोप है कि प्रस्तावित दर सूची अत्यधिक जटिल और अव्यवहारिक है, जिससे आम जनता पर अतिरिक्त आर्थिक और प्रशासनिक बोझ पड़ेगा। ज्ञापन सौंपते हुए अधिवक्ता संघर्ष समिति के संयोजक एडवोकेट उमेश चंद्र शुक्ला ने कहा कि प्रस्तावित सर्किल रेट की दर सूची को छह जटिल चरणों में तैयार किया गया है। स्थिति यह है कि इसे समझना सामान्य नागरिकों के लिए तो दूर, अधिकांश अधिवक्ताओं और विभागीय अधिकारियों के लिए भी बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है।
उन्होंने कहा, शासन का मूल उद्देश्य प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और जनहितकारी बनाना होना चाहिए। किंतु विभाग के उच्च अधिकारियों द्वारा तैयार की गई यह नई व्यवस्था इसके बिल्कुल विपरीत है। इससे आम नागरिकों के बीच अनावश्यक भ्रम, कागजी जटिलता और आर्थिक कठिनाइयां उत्पन्न होंगी। अधिवक्ता संघर्ष समिति ने मांग की है कि प्रस्तावित नवीन एवं जटिल दर सूची को उसके वर्तमान स्वरूप में कतई लागू न किया जाए। यदि राजस्व हित में दरों में वृद्धि करना अनिवार्य ही है, तो उसे वर्तमान में लागू दर सूची के आधार पर ही पारदर्शी तरीके से संशोधित किया जाए।अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी कि यदि जनता अपनी ही भूमि के क्रय-विक्रय की प्रक्रिया और करों को समझने में असमर्थ रहेगी, तो इससे शासन के प्रति असंतोष पनपेगा और उत्तर प्रदेश सरकार की जनहितकारी छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ज्ञापन में सोनभद्र जिले के प्रभारी मंत्री का ध्यान आकृष्ट कराते हुए कहा गया कि वे विगत चार वर्षों से जनपद के प्रभारी मंत्री हैं और यहाँ की भौगोलिक, सामाजिक तथा आर्थिक स्थितियों से भली-भांति परिचित हैं। इसके बावजूद ऐसी नीति लाना अत्यंत चिंताजनक है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कृषि भूमि के क्रय हेतु ग्रामीण क्षेत्रों में 300 वर्गमीटर तथा विकासशील क्षेत्रों में 500 वर्गमीटर की सीमा तय की गई है, जो सोनभद्र की वास्तविक परिस्थितियों के बिल्कुल अनुकूल नहीं है। सोनभद्र में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) की एक बड़ी आबादी निवास करती है। ऐसे में यह सीमा निर्धारण व्यवहारिक न होकर गरीब और ग्रामीण नागरिकों के शोषण का कारण बन सकता है।
इस विरोध-प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान अधिवक्ता संघर्ष समिति के संयोजक एडवोकेट उमेश चंद्र शुक्ला के साथ बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से
संजय द्विवेदी, दिनेश पांडे, नंदलाल पाठक, सुशील पांडे,अर्जुन शर्मा, अजय यादव, मनीष मिश्रा, अमित उपाध्याय, मनोज पाठक, कमलेश यादव, राजीव कुमार दत्ता कौशल पांडे, वीरेंद्र पांडेय, एस. के. जैन ,समेत तहसील एवं उप-निबंधक कार्यालय के तमाम अन्य अधिवक्ता एवं कानूनी प्रतिनिधि उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में मांग की कि शासन जनहित को सर्वोपरि रखते हुए इस जटिल सर्किल रेट नीति में तुरंत सुधार करे।
ओबरा संपत्तियों के नए सर्किल रेट के विरोध में अधिवक्ताओं का प्रदर्शन, प्रभारी मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
Related Posts
Add A Comment

