बाराचवर/गाजीपुर। आलू को सब्जियों का राजा कहा जाता है, लेकिन इस समय आलू उत्पादक किसान अपने ही उत्पाद के भाव को लेकर परेशान हैं। महीनों की मेहनत, भारी लागत और लंबे इंतजार के बाद भी आलू का बाजार भाव किसानों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा है। किसानों के अनुसार कई जगह थोक बाजार में आलू का भाव घटकर करीब 330 रुपये प्रति कुंतल तक पहुंच गया है, जिससे लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
किसानों का कहना है कि आलू की खेती सामान्य खेती की तुलना में काफी खर्चीली और मेहनत वाली है। खेती की शुरुआत खेत में ढैचा बोने से होती है। इसके बाद उसकी जुताई, पलेवा और कई बार जुताई कर खेत को तैयार किया जाता है। खेत की तैयारी में डीएपी, यूरिया, पोटाश, कैल्शियम, सल्फर और जिंक सहित विभिन्न पोषक तत्वों का इस्तेमाल करने के साथ रोटावेटर भी चलाना पड़ता है।
इसके बाद आलू के बीज को घर लाकर फैलाने, चिराई और बीज उपचार के लिए दवाओं के प्रयोग में खर्च होता है। उपचारित बीज को बोरियों में भरकर खेत तक पहुंचाया जाता है और मशीन से बुवाई की जाती है। बुवाई के बाद नालियां बनाने तथा खरपतवार नियंत्रण के लिए दवाओं का छिड़काव किया जाता है।
फसल तैयार होने तक किसानों को तीन से चार बार सिंचाई और कई चरणों में दवाओं का छिड़काव करना पड़ता है। किसानों के मुताबिक फसल को रोग और कीटों से बचाने के लिए अलग-अलग समय पर कई प्रकार की दवाओं और मिश्रणों का प्रयोग करना पड़ता है।
फसल तैयार होने के बाद भी किसान का खर्च खत्म नहीं होता। मशीन से खुदाई, मजदूरों से आलू बिनवाना, बोरी खरीदना, सिलाई, ट्रैक्टर का किराया, कोल्ड स्टोर तक ढुलाई, उतराई और फिर कोल्ड स्टोर का किराया—इन सभी मदों पर किसान को भारी रकम खर्च करनी पड़ती है।
किसानों का कहना है कि आलू की खेती में लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि बिक्री मूल्य में स्थिरता नहीं है। कभी भाव तेजी से बढ़ जाता है तो कभी अचानक गिर जाता है। ऐसे में किसान को अपनी उपज का उचित मूल्य मिलने की कोई गारंटी नहीं रहती।
किसानों का आरोप है कि खेत और कोल्ड स्टोर से निकलने वाले आलू तथा उपभोक्ता तक पहुंचने वाले आलू के दाम में बड़ा अंतर रहता है। थोक बाजार में बिचौलियों और व्यापारियों का मुनाफा बना रहता है, जबकि उत्पादन करने वाला किसान लागत और जोखिम उठाने के बावजूद घाटे की स्थिति में पहुंच जाता है।
आलू उत्पादक किसानों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि आलू का न्यूनतम लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने, भंडारण एवं विपणन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और किसानों को बिचौलियों के शोषण से बचाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। किसानों का कहना है कि यदि उत्पादन लागत के अनुरूप उचित मूल्य नहीं मिला तो आने वाले समय में आलू की खेती से किसानों का मोहभंग हो सकता है।

