गाजियाबाद, 24 जून 2026 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के देशव्यापी समारोहों की श्रृंखला में आज उत्तर प्रदेश पश्चिम के गाजियाबाद (इन्दिरापुरम) में एक भव्य और निःशुल्क योग शिविर का आयोजन किया गया। इन्दिरापुरम के ज्ञान खंड-1 स्थित मुख्य पार्क में आयोजित इस शिविर में स्थानीय निवासियों ने भोर की पहली किरण के साथ ही बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। प्रातः 6:00 बजे से शुरू होकर 7:30 बजे तक चले इस विशेष सत्र में साधकों को योग के क्रियात्मक और व्यावहारिक पहलुओं से परिचित कराया गया। आज गंगा दशहरा के पावन पर्व पर आयोजित इस सत्र का मुख्य संचालन भारत स्वाभिमान न्यास (सोनभद्र) के जिला प्रभारी योग गुरु वीरेंद्र योगी जी द्वारा किया गया। उल्लेखनीय है कि वीरेंद्र योगी जी ने वर्ष 2006 में पतंजलि योगपीठ हरिद्वार से विधिवत प्रशिक्षण प्राप्त कर परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज के सानिध्य में योग की दीक्षा ली थी। तब से वे निरंतर देश के विभिन्न राज्यों और जिलों में घूम-घूमकर निःशुल्क योग कक्षाओं के माध्यम से जन-जागृति फैला रहे हैं।
इस स्थानीय शिविर को सफल और सुव्यवस्थित बनाने में स्थानीय योग संचालक भाई सतीश जी और भारत स्वाभिमान के जिला प्रभारी भ्राता राकेश यादव जी का विशेष नेतृत्व और सराहनीय योगदान रहा। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और असंतुलित दिनचर्या से उपजी बीमारियों को ध्यान में रखते हुए, योग गुरु वीरेंद्र योगी जी ने उपस्थित साधकों को रोग-अनुसार विशेष योगाभ्यास कराया। उन्होंने मुख्य रूप से तीन गंभीर समस्याओं पर ध्यान केंद्रित किया। इंसुलिन के संतुलन और पैनक्रियाज को सक्रिय करने के लिए मंडूकासन और पवनमुक्तासन का गहन अभ्यास कराया गया। गले की ग्रंथियों को स्वस्थ रखने और हार्मोनल असंतुलन को ठीक करने के लिए उज्जाई प्राणायाम और सिंहासन की तकनीक सिखाई गई। रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाने और नसों के खिंचाव को दूर करने के लिए विशेष सूक्ष्म व्यायामों का अभ्यास कराया गया। शिविर के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य योग गुरु वीरेंद्र योगी जी ने योग के दार्शनिक और आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा नियमित योग के अभ्यास से तन, मन और शरीर पूरी तरह स्वस्थ रहता है। योग केवल शारीरिक कसरत नहीं है, बल्कि यह हमारी मानसिक और बौद्धिक चेतना का विकास करता है, जिससे पूरा शरीर सकारात्मक और दिव्य ऊर्जा से भर जाता है। इसके साथ ही जब हम योग के साथ यज्ञ-हवन का अनुष्ठान करते हैं, तो हमें दिव्य शक्ति की अनुभूति होने लगती है। हमारे प्राचीन ऋषियों, महर्षियों, देवर्षियों और साधु-संतों ने हिमालय की कंदराओं में गहन शोध करके हमें स्वस्थ रहने की यह अनमोल विधा सौंपी थी, जिसे 21वीं सदी में परम पूज्य श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी महाराज ने चरितार्थ कर घर-घर तक पहुँचाया है। आज समय की मांग है कि हम सभी योग की इस वास्तविक शक्ति को पहचानें। इस पावन अवसर पर क्षेत्र में योग की अलख जगाने वाले और निस्वार्थ सेवा देने वाले स्थानीय योग शिक्षकों को मंच से सम्मानित किया गया। योग गुरु वीरेंद्र योगी जी द्वारा स्थानीय योग शिक्षक भाई सतीश जी को श्रद्धेय स्वामी जी महाराज द्वारा लिखित अमूल्य व्याकरण पुस्तक भेंट की गई।
योग शिक्षिका बहन आरती जी को उनकी निरंतर और निष्ठावान सेवाओं के लिए साधना काल नामक पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया गया। योग गुरु वीरेंद्र योगी जी ने अपने संबोधन में बताया कि यह व्यापक अभियान उत्तर प्रदेश पूर्व के राज्य प्रभारी श्रद्धेय श्रीभगवान जी और पतंजलि योग समिति के राज्य प्रभारी श्रद्धेय दुर्गेश जी के कुशल मार्गदर्शन और कुशल रणनीति के कारण ही निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्हीं की प्रेरणा और संबल से वे सोनभद्र की सीमाओं से बाहर निकलकर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों सहित अन्य राज्यों में भी निरंतर निःशुल्क योग शिविर आयोजित कर रहे हैं, ताकि स्वामी रामदेव जी महाराज के योगमय और आयुवेदमय विश्व के संकल्प को पूरा किया जा सके। कल्याण मंत्र और शांति पाठ के साथ इस सफल योग शिविर का समापन हुआ।
गाजियाबाद में निःशुल्क योग शिविर का आयोजन, वीरेंद्र योगी ने सिखाए असाध्य रोगों से मुक्ति के गुर
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