विकासखंड भांवरकोल क्षेत्र के ग्राम पंचायत शाहपुर में बना सामुदायिक शौचालय अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। बनने के दिन से ही यह शौचालय ग्रामीणों के लिए किसी काम का नहीं रहा। ताला जस का तस लगा है और केयरटेकर सिर्फ मानदेय लेने आती है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शौचालय का ताला कभी खुलता ही नहीं। न गांव के लोग और न ही आसपास के मोहल्ले के लोग इसका उपयोग कर पाए हैं। शौचालय की जिम्मेदारी संभाल रही केयरटेकर समय पर आती ही नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि वह सिर्फ ग्राम प्रधान कंचन यादव के दरवाजे पर हाजिरी लगाकर मानदेय ले जाती है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में कई बार ग्राम प्रधान कंचन यादव से शिकायत की गई, लेकिन कोई असर नहीं हुआ। शौचालय तक जाने वाला रास्ता भी पूरी तरह खराब हो चुका है। कीचड़ और गड्ढों के कारण महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए वहां तक पहुंचना “लोहे के चने चबाने” जैसा है। रास्ता बनवाने की मांग भी प्रधान से की गई, पर कोई सुनवाई नहीं हुई।
ग्रामवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि शौचालय को तुरंत चालू कराया जाए, केयरटेकर की जिम्मेदारी तय की जाए और शौचालय तक पक्का रास्ता बनवाया जाए। नहीं तो सरकारी धन से बना यह शौचालय धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील हो जाएगा |

