स्थानीय विकास खंड में लंबे इंतजार के बाद मौसम ने अपनी करवट बदली है। क्षेत्र में हुई रिमझिम बारिश ने न सिर्फ मौसम को खुशनुमा बना दिया है, बल्कि भीषण गर्मी और सूखे की मार झेल रहे स्थानीय किसानों के चेहरों पर भी एक बार फिर से खुशी की लहर दौड़ पड़ी है। इस मानसूनी फुहार के साथ ही क्षेत्र के खेतों की खोई हुई रौनक वापस लौट आई है।
धान की फसल लगाने में जुटे किसान
बारिश की बूंदें गिरते ही खेतों में हलचल तेज हो गई है। भांवरकोल विकास खंड के किसान अपनी मुख्य खरीफ फसल यानी धान की फसल लगाने (रोपनी) के काम में पूरी तरह से व्यस्त हो गए हैं। जो किसान पानी की कमी के चलते अब तक चिंतित थे, वे अब सजग होकर अपने खेतों को तैयार करने और रोपाई कार्य को पूरा करने में जी-जान से जुट गए हैं।
लोचाइन समेत कई गांवों में रोपनी ने पकड़ी रफ्तार
इस बारिश का सीधा असर ग्रामीण इलाकों में देखने को मिल रहा है। लोचाइन गांव सभा में किसान बड़े पैमाने पर खेतों में उतर चुके हैं और वहां रोपाई का काम जोरों पर चल रहा है। लोचाइन के साथ-साथ आसपास के इलाकों में भी कृषि कार्यों की गति तेज हो गई है। मुख्य रूप से ,
अवथही, सुखडेहरा, बाठा
बसनिया , बदौली , बीरपुर
सहित लगभग सभी नजदीकी गांवों में धान की रोपनी की शुरुआत हो चुकी है।
उम्मीद की नई किरण
मौसम की इस अनुकूलता ने किसानों को एक बेहतर पैदावार की उम्मीद जगाई है। रिमझिम बारिश को धान की प्रारंभिक रोपाई के लिए बेहद फायदेमंद माना जा रहा है, जिससे पौधों की पकड़ मजबूत होगी। किसानों का कहना है कि अगर मौसम का मिजाज इसी तरह मेहरबान रहा, तो इस बार धान की अच्छी फसल होने की पूरी संभावना है। खेतों में चारों तरफ फैली हरियाली और किसानों का उत्साह यह साफ बयां कर रहा है कि यह बारिश क्षेत्र के ग्रामीण जीवन के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है।
मौसम की मेहरबानी, भांवरकोल में रिमझिम बारिश से खिले किसानों के चेहरे, खेतों में लौटी रौनक
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