ओबरा, सोनभद्र (23 जून 2026) सोनभद्र जनपद के ओबरा स्थित रेणुका छठ घाट पर सोमवार की शाम एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। ओबरा डैम से अचानक पानी छोड़े जाने के कारण नदी के बीच टापू पर सेल्फी ले रहे दिल्ली और ओबरा के 11 लोग बीच धारा में फंस गए। पानी का बहाव इतना तेज था कि करीब डेढ़ से दो घंटे तक सभी की सांसें अटकी रहीं। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस, प्रशासन, मीडियाकर्मियों और ग्रामीणों की त्वरित सक्रियता से सभी 11 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। जानकारी के अनुसार, सोमवार (22 जून) की शाम ओबरा के कुछ स्थानीय बच्चों के साथ दिल्ली से आए हुए उनके कुछ मेहमान रेणुका छठ घाट घूमने गए थे। शुरुआत में नदी में पानी का स्तर काफी कम था, जिसके कारण ये सभी लोग पानी की लहरों को करीब से देखने और तस्वीरें खिंचाने के लिए नदी के बिल्कुल बीचों-बीच पहुँच गए। वहां सभी लोग मोबाइल से सेल्फी लेने और वीडियो (रील) बनाने में इस कदर मशगूल हो गए कि उन्हें समय और आने वाले खतरे का अंदाजा ही नहीं रहा। शाम करीब 6:00 से 6:30 बजे के बीच अचानक ओबरा डैम से नदी में पानी छोड़ दिया गया। पानी खुलते ही नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। किनारे पर मौजूद कुछ स्थानीय लोगों ने जब पानी बढ़ता देखा, तो उन्होंने शोर मचाना शुरू किया और टापू पर मौजूद लोगों को तुरंत भागने को कहा।चीख-पुकार सुनकर कुछ लोग तो समय रहते नदी से बाहर निकल आए, लेकिन तब तक पानी का बहाव इतना तेज हो चुका था कि 11 लोग नदी के बीचों-बीच ही फंस गए। जैसे ही प्रशासन को इसकी भनक लगी, तुरंत संपर्क साधकर डैम से छोड़े जा रहे पानी को बंद कराया गया। हालांकि, पानी बंद होने के बाद भी नदी की धारा इतनी तेज थी कि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कुछ घंटों तक नदी के बीच ही रुकना पड़ा। नदी के बीच फंसे लोगों में ओबरा सेक्टर-10 के रहने वाले चार नाबालिग बच्चे और दिल्ली से आए हुए उनके रिश्तेदार शामिल थे। ओबरा के स्थानीय निवासी सभी नाबालिग आदित्य उम्र 15 वर्ष ,राहुल 15 वर्ष,देव 14 वर्ष,आलोक 16 वर्ष, दिल्ली से आए मेहमान सैलानी, नितिन 42 वर्ष,शामली, कुशल,माही, राशि, गरिमा,सहित कुल 11 लोग घटना की सूचना मिलते ही सजगता दिखाते हुए पत्रकार अजीत सिंह एवं सुरेंद्र सिंह और ओबरा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 13 के सभासद अजीत कनौजिया अपने साथियों के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। इसके साथ ही सूचना पाकर पीआरवी 112, ओबरा थाना प्रभारी और क्राइम इंस्पेक्टर भी दलबल के साथ घाट पर पहुंच गए। मौके पर एलआईयू (LIU) के अधिकारी भी मुस्तैदी से डटे रहे। सभासद अजीत कनौजिया, उनके सहयोगियों, पत्रकारों और ओबरा पुलिस ने अपनी जान जोखिम में डालकर भारी मशक्कत के बाद बेहद सूझबूझ के साथ बीच नदी में फंसे सभी 11 लोगों को एक-एक कर सुरक्षित बाहर निकाला। सुरक्षित बाहर आने के बाद बच्चों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली और पूरी रेस्क्यू टीम का दिल से आभार व्यक्त किया। रेणुका छठ घाट पर पहले भी इस तरह की कई घटनाएं हो चुकी हैं। इस बार बड़ा हादसा टलने के बाद जागरूक नागरिकों और प्रबुद्ध वर्ग ने बाबा भूतेश्वर दरबार के संचालक एवं ओबरा नगर पंचायत की अध्यक्ष से विशेष आग्रह किया है। घाट पर तुरंत एक बड़ा और स्पष्ट चेतावनी बोर्ड लगाया जाए, जिस पर साफ शब्दों में लिखा हो कृपया सावधान रहें। यह कोई सेल्फी पॉइंट नहीं है, बल्कि एक संवेदनशील बाढ़ क्षेत्र है। स्थानीय प्रशासन और जागरूक नागरिकों ने जनता से अपील की है कि डैम के पास नदी के स्वरूप और पानी की अचानक आने वाली रफ्तार को भांपना बेहद मुश्किल होता है। इसलिए पानी कम देखकर कभी भी नदी के बीच में न जाएं और विशेषकर सेल्फी या रील बनाने के चक्कर में अपनी और अपने बच्चों की जान जोखिम में न डालें।
ओबरा के रेणुका छठ घाट पर बड़ा हादसा टला डैम का पानी छूटने से बीच नदी में फंसे दिल्ली व ओबरा के 11 सैलानी, घंटों मची रही चीख-पुकार
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