लखनऊ मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र के सरथूवा गांव में करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी ऊसर-बंजर भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों ने चर्चित प्लाटिंग कंपनी राजघराना सीआईडी प्राइवेट लिमिटेड पर गाटा संख्या 174 ड व 174 च की लगभग डेढ़ बीघा सरकारी भूमि पर कब्जा कर बाउंड्रीवॉल खड़ी करने, सड़क निर्माण कराने और अन्य विकास कार्य शुरू कराने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी भूमि की मौजूदा बाजार कीमत करोड़ों रुपये में है, ऐसे में इस पर कब्जे के आरोप ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली और राजस्व विभाग की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।ग्रामीणों के मुताबिक सरथूवा गांव और आसपास के क्षेत्र में तेजी से प्लाटिंग और आवासीय परियोजनाएं विकसित हो रही हैं, जिसके चलते भूमि के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। ऐसे में सरकारी खाते में दर्ज ऊसर-बंजर भूमि भी आज करोड़ों रुपये की संपत्ति बन चुकी है। आरोप है कि इसी बहुमूल्य सरकारी जमीन को निजी परियोजना में शामिल करने की कोशिश की जा रही है।ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी ने सरकारी भूमि के चारों ओर बाउंड्रीवॉल खड़ी कर दी है। भूमि की जुताई कराने के साथ पाइपलाइन डलवाई गई है तथा सड़क निर्माण का कार्य भी शुरू करा दिया गया है। आरोप है कि निर्माण कार्य इस तरह कराया जा रहा है मानो उक्त भूमि निजी स्वामित्व की हो, जबकि राजस्व अभिलेखों में वह सरकारी भूमि के रूप में दर्ज है।
ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे मामले की शिकायत कई बार क्षेत्रीय लेखपाल, कानूनगो और तहसील प्रशासन से की गई, लेकिन किसी स्तर पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। न तो भूमि की पैमाइश कराई गई और न ही निर्माण कार्य रुकवाया गया। इससे ग्रामीणों में यह चर्चा है कि आखिर शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मौन क्यों हैं।
गांव के लोगों का कहना है कि यदि समय रहते राजस्व विभाग सक्रिय होता तो करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी संपत्ति पर कब्जे के आरोपों की नौबत ही नहीं आती। ग्रामीणों ने क्षेत्रीय लेखपाल की भूमिका को संदिग्ध बताते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।सरकारी संपत्ति पर स्थायी कब्जे की आशंका ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप नहीं किया तो सरकारी भूमि पर स्थायी निर्माण हो सकता है, जिससे भविष्य में उसे कब्जामुक्त कराना और अधिक कठिन हो जाएगा। साथ ही सार्वजनिक उपयोग की भूमि और रास्तों पर भी असर पड़ने की आशंका है।ग्रामीणों ने जिलाधिकारी और उपजिलाधिकारी से मांग की है कि राजस्व टीम द्वारा तत्काल मौके की पैमाइश कराई जाए, निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए, सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया जाए और दोषियों के विरुद्ध कठोर राजस्व एवं कानूनी कार्रवाई की जाए।कार्यवाहक एसडीएम बृजेश वर्मा ने कहा, सरथूवा गांव में सरकारी भूमि पर कब्जे की शिकायत प्राप्त हुई है। राजस्व टीम को जांच के निर्देश दिए गए हैं। भूमि की पैमाइश कराई जाएगी। यदि जांच में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा या निर्माण कार्य पाया जाता है तो नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकारी भूमि पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।सरथूवा में करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी भूमि पर कब्जे के आरोपों ने पूरे क्षेत्र में हलचल मचा दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी क्यों हुई और क्या जांच के बाद सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराया जा सकेगा। ग्रामीणों की निगाहें अब प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
करोड़ों की सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप, राजघराना बिल्डर पर गंभीर सवाल; शिकायतों के बावजूद चुप रहा राजस्व विभाग
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