सोनभद्र जिले के नगवा ब्लॉक अंतर्गत चेरुई सहकारी समिति पर गुरुवार को खाद की किल्लत से आक्रोशित सैकड़ों किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया। मानसून की बारिश शुरू होने के बाद जहां खेतों में बुवाई और रोपाई का काम तेजी पर है, वहीं किसान डीएपी (DAP) और यूरिया के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। अधिकारियों से बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जब खाद की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं हुई, तो किसानों का धैर्य टूट गया और उन्होंने आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया।आमतौर पर प्रदर्शनों में नारेबाजी और तालाबंदी देखने को मिलती है, लेकिन चेरुई सहकारी समिति पर किसानों ने विरोध का एक बेहद अनूठा और संदेशपरक तरीका अपनाया। प्रदर्शन के दौरान किसान संगठनों और आंदोलनकारियों ने वहां मौजूद सभी किसान परिवारों को सैकड़ों फलदार और छायादार पौधे वितरित किए। किसानों का आरोप है कि एक तरफ जिला प्रशासन विकास और उद्योगों के नाम पर 100 एकड़ प्राकृतिक जंगल को उजाड़ने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वे पर्यावरण को बचाने की जंग लड़ रहे हैं। किसानों ने बताया कि वे पिछले एक महीने से लगातार पेड़ है तो प्राण है अभियान चला रहे हैं, जिसके तहत अब तक हजारों पौधों का वितरण किया जा चुका है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता संदीप मिश्रा ने स्थानीय प्रशासन की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह किल्लत प्राकृतिक नहीं बल्कि प्रायोजित है। स्थानीय प्रशासन के कुछ लोग जानबूझकर किसानों की खेती-बारी चौपट करने पर तुले हुए हैं। जिला प्रशासन द्वारा किसानों की रीढ़ तोड़ने की यह कोशिश इसलिए की जा रही है ताकि मजबूर होकर किसान अपनी जमीनें बेच दें और यहां उद्योगपतियों के लिए आसानी से जमीनें खरीदी जा सकें। लेकिन किसान इस तरह का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे। प्रदर्शनकारी किसानों ने सोनभद्र के जिलाधिकारी चर्चित गौड़ से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। जिले के नगवा सहित सभी ब्लॉकों की सहकारी समितियों का प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा तत्काल भौतिक निरीक्षण किया जाए। प्रत्येक किसान परिवार को उनके भूमि के रकबे (खतौनी) के आधार पर बिना किसी भेदभाव और कालाबाजारी के पर्याप्त मात्रा में यूरिया और डीएपी खाद उपलब्ध कराई जाए। विकास के नाम पर उजाड़े जा रहे 100 एकड़ जंगल को बचाने के लिए नीतिगत कदम उठाए जाएं।
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही चेरुई समिति पर पर्याप्त मात्रा में यूरिया और डीएपी की रैक नहीं पहुंची, तो यह आंदोलन पूरे नगवा ब्लॉक और तहसील मुख्यालय तक फैलेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।
खाद की किल्लत पर सोनभद्र के चेरुई समिति पर किसानों का प्रदर्शन, विरोध में बांटे फलदार पौधे
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