कोटा, सोनभद्र की धरती पूरे उत्तर प्रदेश को रोशन करने के लिए बिजली देती है, देश के विकास के लिए कोयला देती है, और निर्माण कार्यों के लिए बालू, पत्थर, एल्यूमिनियम व सीमेंट जैसे अमूल्य संसाधन देती है। सूबे के राजस्व में भी इस जिले की हिस्सेदारी शीर्ष पर है। लेकिन विडंबना देखिए कि जिस जिले के सीने से निकले संसाधनों से पूरा प्रदेश समृद्ध हो रहा है, उसी जिले का गरीब आज भी एक अदद बेहतर इलाज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। इसी पीड़ा और प्रशासनिक उपेक्षा के खिलाफ राष्ट्रीय नव निर्माण सेना ट्रस्ट द्वारा रॉबर्ट्सगंज विधानसभा के ग्राम पंचायत कोटा में एक विशाल हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। अभियान का मुख्य उद्देश्य सोनभद्र में बीएचयू (BHU) स्तर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थापना और कोन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तत्काल नियुक्ति कराना है। इस जनआंदोलन का नेतृत्व ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनन्द पटेल दयालु ने किया। हस्ताक्षर अभियान के दौरान उपस्थित ग्रामीणों, आदिवासियों और युवाओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष आनन्द पटेल दयालु ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल या संगठन की व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है, बल्कि यह सोनभद्र के गरीब, मजदूर, किसान और आम जनता के जीवन और उनके मौलिक अधिकारों की लड़ाई है। और उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा जब तक सोनभद्र के अंतिम पंक्ति में बैठे हुए असहाय व्यक्ति को उसका वाजिब न्याय और स्वास्थ्य का अधिकार नहीं दिला देते, तब तक हमारा यह संघर्ष रुकने वाला नहीं है। यह आंदोलन अनवरत जारी रहेगा। उन्होंने आगे कहा कि सोनभद्र प्रदेश को सब कुछ देता है, लेकिन बदले में यहां के लोगों को अच्छा अस्पताल और पर्याप्त विशेषज्ञ डॉक्टर तक नहीं नसीब होते। कोन क्षेत्र के लोगों को एक सामान्य इलाज के लिए भी लगभग 70 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज भागना पड़ता है। यदि मरीज की स्थिति गंभीर हो जाए, तो उन्हें 160 किलोमीटर दूर वाराणसी (बीएचयू) रेफर कर दिया जाता है, जहां घंटों लंबी लाइनों में लगने के बाद भी समय पर बेड और इलाज मिलना नसीब नहीं होता। आर्थिक तंगी के कारण कई गरीब परिवार रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। ट्रस्ट के प्रदेश अध्यक्ष जनाब महताब आलम ने भी सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सोनभद्र प्रदेश को भारी राजस्व देने के बावजूद स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में जानबूझकर पिछड़ा रखा गया है। जिले में दो अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित विधानसभा क्षेत्र हैं, जहां की एक बड़ी आबादी आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है। उन्होंने बताया कि शक्तिनगर जैसे दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों को इलाज के लिए 200 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करनी पड़ती है। कई बार समय पर समुचित चिकित्सा न मिलने के कारण लोग रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। ऐसे में सोनभद्र के भौगोलिक स्वरूप को देखते हुए यहां एक सर्वसुविधायुक्त सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल और सभी प्रमुख विभागों के विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता समय की सबसे बड़ी मांग है।
इस अभियान में ग्राम पंचायत कोटा और आस-पास के मजरे से आए ग्रामीणों, महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग लिया। लोगों ने स्वेच्छा से आलेख पर अपने हस्ताक्षर किए और मोबाइल नंबर दर्ज कर इस जनआंदोलन को अपना खुला समर्थन दिया। इस दौरान पूरा परिसर सोनभद्र को उसका अधिकार दो BHU स्तर का अस्पताल दो और अस्पताल हमारा अधिकार है, संघर्ष हमारा संकल्प है जैसे गगनभेदी नारों से गूंज उठा। इस बड़े जन अभियान को सफल बनाने में चंद्रशेखर सिंह पटेल, विकास कुमार गौड़ (प्रदेश सचिव), डॉ. प्रभाकर सिंह, रविंद्र कुमार शर्मा (जिला संगठन मंत्री), उमाशंकर शर्मा,अयोध्या प्रसाद, अमरेश सिंह सहित भारी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक और सैकड़ों आंदोलनकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक सुर में संकल्प लिया कि जब तक सरकार इस मांग को पूरा नहीं करती, वे चैन से नहीं बैठेंगे।
जब तक सोनभद्र के अंतिम व्यक्ति को न्याय नहीं मिलता, संघर्ष जारी रहेगा आनंद पटेल दयालु बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए कोटा में हस्ताक्षर अभियान
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