रेणुकूट (सोनभद्र)। एक तरफ केंद्र व प्रदेश सरकार हर घर जल और स्वच्छ भारत मिशन जैसी महत्वाकांक्षी योजनाओं के जरिए समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का दावा कर रही है। वहीं दूसरी ओर, औद्योगिक नगरी रेणुकूट नगर पंचायत इन दिनों बदहाली के आंसू रो रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों द्वारा किए गए संयुक्त नगर भ्रमण के दौरान जो जमीनी हकीकत सामने आई, वह बेहद डरावनी और प्रशासनिक विफलता की जीती-जागती मिसाल है। वार्ड संख्या 7 (भिखारी मोहल्ला) और वार्ड संख्या 1 (गुजराती मोहल्ला) में बदहाली का आलम यह है कि सरकारी योजनाएं सिर्फ कागजों तक सिमट कर रह गई हैं और जनता बुनियादी हक के लिए भी संघर्ष कर रही है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के हर घर शौचालय और खुले में शौच से मुक्ति के सपने को रेणुकूट में किस तरह शर्मसार किया जा रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ सार्वजनिक शौचालय व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। हद तो तब हो गई जब इसके उपयोग का समय भी तानाशाही तरीके से तय कर दिया गया है।शौचालय खोलने का समय प्रातः 6:00 बजे से 8:00 बजे तक और सायं 6:00 बजे से 7:00 बजे तक निर्धारित किया गया है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने सवाल उठाया है कि इस निर्धारित समय के अलावा यदि किसी बुजुर्ग, बच्चे या बीमार व्यक्ति को आपातकालीन जरूरत पड़े, तो वह इस तुगलकी फरमान के बीच कहाँ जाए। विदित हो कि मानसून के आगमन को देखते हुए सोनभद्र के जिलाधिकारी ने पहले ही सख्त निर्देश जारी किए थे कि सभी नगर और ग्राम पंचायतों में नालों, नालियों और नलों के आसपास युद्धस्तर पर साफ-सफाई कराई जाए, ताकि गंदगी से संक्रामक बीमारियां न फैलें। लेकिन रेणुकूट नगर पंचायत प्रशासन ने जिला प्रमुख के इन जनहितकारी आदेशों को पूरी तरह रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। सड़कों पर बजबजाती नालियां और कूड़े के ढेर आने वाले दिनों में किसी बड़ी महामारी को दावत दे रहे हैं।
नगर भ्रमण के दौरान पीड़ित जनता ने वीडियो के माध्यम से अपना भारी आक्रोश व्यक्त किया। स्थानीय महिलाओं और बुजुर्गों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े दावे करने वाले जनप्रतिनिधियों के राज में आज जनता पानी और सफाई जैसी बुनियादी चीजों के लिए भी तरस रही है। मौके पर पहुंचे समाजसेवियों ने पीड़ित जनता का हाल जाना, उनकी समस्याओं को सुना और उन्हें हर संभव यथाशक्ति सहयोग का आश्वासन दिया। करोड़ों रुपये के बजट वाली इस नगर पंचायत में चल रही इस अव्यवस्था को स्थानीय नागरिकों ने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार और तानाशाही का नतीजा बताया है। क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन और सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि रेणुकूट नगर पंचायत में चल रहे इस शौचालय खेल और पानी-सफाई की घोर किल्लत पर तत्काल उच्चस्तरीय जांच बिठाई जाए और दोषी अधिकारियों व जिम्मेदारों पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
रेणुकूट नगर पंचायत या नरक पंचायत करोड़ों का बजट फिर भी बूंद-बूंद पानी को तरस रही जनता, शौचालय पर तानाशाही टाइमिंग से आक्रोश
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