सोनभद्र/हावड़ा/चोपन भारतीय रेल यात्रियों की सुरक्षा और उनके आरामदायक सफर के चाहे जितने बड़े-बड़े दावे कर ले, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी बेहद डरावनी और परेशान करने वाली है। ताजा मामला हावड़ा से जबलपुर के बीच चलने वाली शक्तिपुंज एक्सप्रेस (11448) के एसी (AC) कोच का है, जहां यात्रियों को सफर के नाम पर भारी मानसिक प्रताड़ना और असुरक्षा का सामना करना पड़ा। एसी कोच के सख्त नियमों को ताक पर रखकर अनाधिकृत वेंडर्स, भिखारियों, हिजड़ों और फर्जी सफाईकर्मियों ने पूरी बोगी को मछली बाजार बना दिया। सबसे शर्मनाक बात यह रही कि जब यात्रियों ने इसकी शिकायत की, तो रेलवे के जिम्मेदार विभागों ने अपनी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर टालकर पल्ला झाड़ लिया।पीड़ित यात्रियों के अनुसार, हावड़ा स्टेशन से ट्रेन खुलने के बाद से ही एसी कोच में बाहरी तत्वों का अनियंत्रित आना-जाना शुरू हो गया।नियमत एसी कोच में किसी भी बाहरी वेंडर, भिखारी या हिजड़ों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित होता है। लेकिन इस ट्रेन में हावड़ा से लेकर रात के 9:00 बजे तक हर 5 मिनट पर कोई न कोई बाहरी व्यक्ति बोगी में घुसकर यात्रियों को तंग कर रहा था। हद तो तब हो गई जब कुछ बाहरी लोग भिखारी के रूप में कोच के अंदर घुसकर जबरन झाड़ू लगाने लगे और यात्रियों से पैसे वसूलने लगे। पीड़ित यात्री ने अपना दर्द बयां करते हुए कहा जब हमने भारी-भरकम पैसे देकर एसी बोगी में रिजर्वेशन करवाया है, तो इसलिए ताकि आराम से सो सकें और हमारा सामान सुरक्षित रहे। मगर यहाँ न तो आदमी का सामान सुरक्षित है और न ही सोने के लिए समय। जब भी कोई यात्री आँख मूंदता है, तभी कोई न कोई भीख मांगने, कोई हिजड़ा वसूली करने, तो कोई फर्जी भिखारी बोगी में घुस आता है। इस लगातार व्यवधान के कारण कोच में बैठे यात्री न तो आराम कर पाए और न ही खुद को सुरक्षित महसूस कर रहे थे। परेशान यात्रियों ने जब रेलवे की आधिकारिक हेल्पलाइन 139 पर शिकायत दर्ज कराई, तो कुछ समय बाद एक अटेंडेंट और आरपीएफ (RPF) का जवान मौके पर पहुंचा। लेकिन समस्या का समाधान करने के बजाय आरपीएफ जवान ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि यह काम टीटीई (TTE) और अटेंडेंट का है, हमारा नहीं। जवान ने मामले को आगे फॉरवर्ड करने की बात कही और वहाँ से चलता बना। इसके बाद जब ट्रेन आगे बढ़ी और पीड़ित यात्रियों ने दोबारा शिकायत की, तो रेलवे प्रशासन की तरफ से एक नया और अजीबोगरीब बहानेबाजी का रवैया सामने आया। यात्रियों को बताया गया कि वह आसनसोल डिवीजन का मामला था, अब दूसरा डिवीजन आ गया है, इसलिए आपको फिर से नई शिकायत दर्ज करानी होगी।
हद तो तब हो गई जब रेलवे कर्मचारी पीड़ित यात्रियों से ही बोगी में बाहरी लोगों के होने का साक्ष्य (Proof) मांगने लगे, जबकि उस वक्त भी अनाधिकृत वेंडर कोच के भीतर ही मौजूद थे और यात्रियों ने मौके पर ही उनकी बात भी करवाई। इसके बावजूद रेलकर्मियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जब यात्रियों ने कोच में ड्यूटी पर तैनात टीटीई (TTE) से इस अराजकता की शिकायत की, तो टीटीई ने सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस (RPF/GRP) पर डाल दी और यात्रियों को पुलिस से बात करने को कहा। वहीं दूसरी तरफ पुलिस वाले इसे टीटीई और अटेंडेंट का काम बताते रहे। रेलवे की कस्टमर केयर हेल्पलाइन पर भी यात्रियों को सिर्फ शिकायत दर्ज करने का आश्वासन देकर बातों को गोल-गोल घुमाया गया, लेकिन धरातल पर यात्रियों को कोई राहत नहीं मिली। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर यात्रियों में भारी आक्रोश है। पीड़ित पक्ष का कहना है कि उनके पास इस पूरी लापरवाही और रेलवे की पोल खोलते पुख्ता वीडियो और ऑडियो सबूत मौजूद हैं। कोच के अंदर अवैध रूप से झाड़ू लगा रहे बाहरी शख्स का वीडियो, अटेंडेंट और टीटीई से हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग और हेल्पलाइन पर की गई शिकायतों का पूरा ब्योरा (कॉल रिकॉर्ड्स) उपलब्ध है, जिसे उच्च स्तर पर पेश किया जाएगा। यह घटना रेलवे प्रबंधन के उन तमाम दावों की धज्जियां उड़ाती है जो यात्रियों की सुरक्षा को लेकर किए जाते हैं। इस मामले से कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं। जब यात्री एसी कोच के लिए हजारों रुपये का किराया देते हैं, तो उनकी प्राइवेसी, आराम और सुरक्षा से इस तरह का खिलवाड़ क्यों किया जा रहा है। क्या आरपीएफ (RPF), जीआरपी (GRP) और टीटीई (TTE) की मिलीभगत या ढिलाई के बिना इतनी बड़ी संख्या में अवैध वेंडर और बाहरी तत्व सुरक्षित एसी कोचों में प्रवेश कर सकते हैं। डिजिटल इंडिया और ‘रेल मदद’ के इस आधुनिक दौर में भी क्या एक डिवीजन से दूसरे डिवीजन में ट्रेन जाते ही यात्रियों की सुरक्षा और उनकी पुरानी शिकायतें शून्य हो जाती हैं। यात्रियों ने अब इस गंभीर मामले को साक्ष्यों सहित सोशल मीडिया के जरिए रेल मंत्री, रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड के उच्चाधिकारियों के समक्ष ले जाने का पूरा मन बना लिया है, ताकि इस रूट पर चलने वाली ट्रेनों में यात्रियों का सफर सुरक्षित हो सके और अपनी ड्यूटी से मुंह मोड़ने वाले दोषी रेलकर्मियों पर सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।
शक्तिपुंज एक्सप्रेस के AC कोच में सुरक्षा और नियमों की धज्जियां वेंडर्स, भिखारियों और हिजड़ों का आतंक हेल्पलाइन से लेकर TTE-RPF ने यात्रियों को घुमाया गोल-गोल
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