रामपुर गांव में गाटा संख्या 506 पर बिना अनुमति पेड़ काटने का आरोप, ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर की शिकायत; ग्राम प्रधान ने लेखपाल को दी सूचना
लखनऊ मोहनलालगंज तहसील क्षेत्र के रामपुर गांव में ग्राम पंचायत की सरकारी जमीन पर खड़े हरे-भरे प्रतिबंधित पेड़ों की कथित रूप से बिना अनुमति कटाई किए जाने का मामला सामने आया है। सरकारी जमीन के गाटा संख्या 506 पर लगे नीम के पेड़ों को लकड़कट्टों द्वारा कथित तौर पर चोरी-छिपे काटे जाने की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।ग्रामीणों के मुताबिक बीते शनिवार को दिनदहाड़े सरकारी जमीन पर खड़े नीम के पेड़ों पर आरा चला दिया गया। आरोप है कि पेड़ों की कटाई के लिए संबंधित विभाग से किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन पर खड़े हरे पेड़ों की कटाई खुलेआम होती रही, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी समय रहते मौके पर नहीं पहुंचे।ग्रामीणों का आरोप है कि पेड़ों की कटाई की सूचना जिम्मेदारों को दिए जाने के बावजूद तत्काल प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई। उनका कहना है कि यदि समय रहते अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की जाती तो सरकारी जमीन पर खड़े पेड़ों को काटे जाने से रोका जा सकता था।मामले को लेकर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन नंबर 1076 पर शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के माध्यम से सरकारी जमीन पर बिना अनुमति पेड़ काटे जाने की जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है।वहीं ग्राम प्रधान सत्य प्रकाश ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित लेखपाल को सूचना दी है। ग्राम प्रधान ने सरकारी जमीन पर पेड़ों की कटाई की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की मांग की है।ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गाटा संख्या 506 की मौके पर जांच कराकर काटे गए पेड़ों का सत्यापन कराया जाए, पेड़ काटने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ नियमानुसार मुकदमा दर्ज किया जाए और सरकारी संपत्ति को हुए नुकसान की भरपाई कराई जाए। इसके साथ ही ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि पेड़ों की कटाई की सूचना के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं करने वाले संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन और सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की है। यदि सरकारी भूमि पर खड़े पेड़ इसी तरह बिना अनुमति काटे जाते रहे तो पर्यावरण के साथ-साथ सरकारी संपत्ति को भी लगातार नुकसान पहुंचता रहेगा। अब ग्रामीणों की शिकायत के बाद प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

