सोनभद्र। अजीत प्रताप सिंह। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार संगठन सोनभद्र की एक आवश्यक बैठक जिलाध्यक्ष कौशल शर्मा की मौजूदगी में वरिष्ठ व्यापारी राजेश जायसवाल के आवास पर आहूत की गई। बैठक में जिला मुख्यालय रॉबर्ट्सगंज की बदहाल जल निकासी और बुनियादी समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की गई। संगठन के पदाधिकारियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि नगर को जलभराव की गंभीर समस्या से मुक्ति दिलाने के नाम पर 36 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि खर्च कर नाला निर्माण कराया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है। बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष कौशल शर्मा ने कहा कि विगत 16 अगस्त की रात्रि महज 40 मिनट हुई बारिश ने नगर की जल निकासी व्यवस्था की ऐसी दुर्दशा सामने ला दी, जिसने विकास कार्यों की गुणवत्ता और प्रशासनिक दूरदर्शिता पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अल्प अवधि की बारिश में ही पूरे नगर की गलियों, मुख्य मार्गों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों में पानी भर गया, यहाँ तक कि कई रिहाइशी मकानों में भी गंदा पानी समा गया। उन्होंने कहा कि 36 करोड़ रुपये की लागत से बना 13 किलोमीटर लंबा यह नाला आम जनता और व्यापारियों के लिए केवल एक सफेद हाथी साबित हो रहा है। नाले से पानी की निकासी न होने के कारण हाल ही में निर्मित नई सड़कें भी उखड़ने लगी हैं और उनमें जगह-जगह गड्ढे बन गए हैं। व्यापार संगठन क्षके पदाधिकारियों ने याद दिलाया कि वर्ष 2020 की इस परियोजना को पिछले वर्ष जून 2025 में आनन-फानन में शुरू किया गया था। क्षसंगठन के एक प्रतिनिधिमंडल ने सीएनडीएस (CNDS) के सहायक अभियंता को ज्ञापन सौंपकर आगाह किया था कि नाली निर्माण की डीपीआर (DPR) संदेहास्पद है और इससे जलभराव की समस्या हल नहीं होगी।र जनपद भ्रमण पर आए राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष को भी ज्ञापन सौंपकर इस भारी अनियमितता से अवगत कराया गया था। इसके बावजूद न तो तकनीकी खामियों को सुधारा गया और न ही दोषियों पर कोई कार्रवाई हुई, बल्कि शिकायतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। व्यापारियों ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक धन का उपयोग कागजों पर काम पूरा दिखाने के लिए नहीं, बल्कि धरातल पर जनता को राहत देने के लिए होना चाहिए। संगठन ने शासन-प्रशासन से निम्नलिखित मांगें रखी है। 36 करोड़ की इस नाला निर्माण योजना की डीपीआर, क्षमता, डिजाइन और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी संस्था से जांच कराई जाए। यह स्पष्ट किया जाए कि निर्माण से पूर्व क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, वर्षा जल की मात्रा और प्राकृतिक जल निकासी मार्गों का वैज्ञानिक अध्ययन किया गया था या नहीं। टुकड़ों में निर्माण कराने के बजाय जिला मुख्यालय के लिए एक समग्र, आधुनिक एवं वैज्ञानिक ड्रेनेज मास्टर प्लान तैयार किया जाए। इस महत्वपूर्ण बैठक में मुख्य रूप से प्रितपाल सिंह, राजेश जायसवाल, जसकीरत सिंह, प्रशांत जैन, राजू जायसवाल, शरद जायसवाल, सिद्धार्थ सांवरिया, सूर्या जायसवाल, अभिषेक साहू, अभिषेक केसरी, गुरप्रीत सिंह, दीप सिंह पटेल, नागेंद्र मोदनवाल, पंकज कनोडिया, प्रदीप जायसवाल, अमित अग्रवाल, टीपू अली, यशपाल सिंह, मंटू केसरी सहित बड़ी संख्या में व्यापारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
36 करोड़ की नाली निर्माण योजना पर उठे सवाल 40 मिनट की बारिश ने खोली जल निकासी व्यवस्था की पोल
Related Posts
Add A Comment

