सोनभद्र। जनपद के खदान क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर जिला प्रशासन बेहद गंभीर है। इसी कड़ी में, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिला प्रशासन की त्वरित पहल पर, खदान क्षेत्र में ड्यूटी के दौरान अपनी जान गंवाने वाले एक संविदा श्रमिक के पीड़ित परिवार को आर्थिक संबल प्रदान किया गया है।जिलाधिकारी के सीधे निर्देशन और मानवीय दृष्टिकोण के चलते, मृतक श्रमिक के विधिक वारिसों (आश्रितों) को 11,48,175 रुपये (ग्यारह लाख अड़तालीस हजार एक सौ पचहत्तर रुपये) की कर्मचारी क्षतिपूर्ति धनराशि का चेक प्रदान किया गया। जिलाधिकारी ने स्वयं अपने हाथों से पीड़ित परिवार को यह चेक सौंपा, जिससे संकट की इस घड़ी में पीड़ित परिवार को बड़ी आर्थिक राहत मिली है। यह दुःखद मामला नार्दन कोलफील्ड्स लिमिटेड (NCL) की सुप्रसिद्ध दुद्धीचुआ परियोजना से जुड़ा है। इस परियोजना के अंतर्गत खनन और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए कार्य कर रही निजी फर्म मेसर्स जी.एस.सी.ओ. इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड (M/s G.S.C.O. Infrastructure Pvt. Ltd.) में पुष्पेन्द्र सिंह बतौर संविदा श्रमिक (Contractual Labour) कार्यरत थे। कुछ समय पूर्व, खदान क्षेत्र में अत्यंत कठिन और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी ड्यूटी निभाने के दौरान एक अप्रत्याशित और भीषण दुर्घटना का शिकार होने के कारण पुष्पेन्द्र सिंह का असामयिक निधन हो गया था। इस हादसे के बाद श्रमिक के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था, क्योंकि वे ही परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। श्रमिक की मृत्यु के बाद जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए कानूनी प्रक्रियाओं को गति दी। जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों के बाद इस मामले को वर्कमैन कम्पनसेशन एक्ट, 1923 (कर्मचारी क्षतिपूर्ति अधिनियम) के अंतर्गत लाया गया। प्रशासनिक स्तर पर मृतक के परिवार और उनके कानूनी उत्तराधिकारियों की गहन पात्रता और दावों का सत्यापन (Verification) किया गया। पूरी जांच और कागजी औपचारिकताएं पारदर्शी तरीके से पूरी होने के बाद, मृतक स्व० पुष्पेन्द्र सिंह के निम्नलिखित आश्रितों के नाम संयुक्त/व्यक्तिगत रूप से चेक निर्गत करने की स्वीकृति दी गई। अनिल सिंह (पत्नी),संचिता सिंह (पुत्री),अंकिता सिंह (पुत्री),
अतुल सिंह (पुत्र),आम तौर पर संविदा श्रमिकों के मामलों में मुआवजा मिलने में लंबा वक्त लग जाता है, लेकिन सोनभद्र जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इस प्रक्रिया को रिकॉर्ड समय में पूरा कराया। कुल ₹11,48,175 की यह स्वीकृत राशि सीधे तौर पर आश्रितों के भविष्य को सुरक्षित करने में मददगार साबित होगी। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में आयोजित एक संक्षिप्त और भावुक कार्यक्रम के दौरान जिलाधिकारी ने स्वयं मृतक के परिजनों से मुलाकात की। जिलाधिकारी ने पीड़ित पत्नी और बच्चों को ढांढस बंधाते हुए कहा कि किसी भी अनमोल जीवन की कमी को पैसों से पूरा नहीं किया जा सकता, लेकिन प्रशासन की यह जिम्मेदारी है कि श्रमिक के पीछे छूटे उनके परिवार को बेसहारा न होने दिया जाए। जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में कहा कि जनपद में सक्रिय सभी सरकारी और निजी आउटसोर्सिंग कंपनियों को श्रम कानूनों का शत-प्रतिशत पालन करना होगा। खदान क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है। यदि कोई कंपनी सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरतती है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। जिलाधिकारी ने स्थानीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि इस पीड़ित परिवार के बच्चों की शिक्षा और अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं (जैसे पारिवारिक पेंशन या राशन कार्ड) का लाभ भी प्राथमिकता के आधार पर दिलाया जाए।प्रशासन की इस त्वरित और मानवीय पहल की स्थानीय श्रमिक संगठनों और प्रबुद्ध वर्ग ने सराहना की है। खदान क्षेत्र के अन्य श्रमिकों ने भी माना कि इस प्रकार की त्वरित कानूनी और आर्थिक सहायता से उनका व्यवस्था पर भरोसा और मजबूत होता है।
सोनभद्र खदान हादसे में जान गंवाने वाले संविदा श्रमिक के परिवार को मिला संबल, जिलाधिकारी ने सौंपा 11.48 लाख का क्षतिपूर्ति चेक
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