बहरियाबाद (गाजीपुर)। नगर पंचायत सादात में पैगम्बर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के नवासे हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को चहल्लुम के अवसर पर बुधवार को नम आंखों से याद किया गया। इस अवसर पर मजलिसों का आयोजन हुआ तथा ताजिया और अलम के साथ श्रद्धापूर्वक जुलूस निकाला गया। विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख्वानी, मातम और सीनाजनी कर शहीद-ए-कर्बला को श्रद्धांजलि अर्पित की। जुलूस का समापन कर्बला पहुंचकर हुआ।
सादात स्थित इमामबाड़े में आयोजित मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सादिक हुसैन नकवी ने कहा कि यजीद शरीयत-ए-मुहम्मदी और पवित्र कुरआन की शिक्षाओं में बदलाव चाहता था। इसी कारण वह हर हाल में हजरत इमाम हुसैन से बैअत लेना चाहता था। उन्होंने कहा कि इमाम हुसैन ने अपने परिवार और साथियों की कुर्बानी देना स्वीकार किया, लेकिन सत्य और न्याय के मार्ग से समझौता नहीं किया। उनकी कुर्बानी आज भी इंसानियत के लिए मिसाल है।
मजलिस से पूर्व अली हसन, औन मुहम्मद तथा सफदर इमाम आब्दी ने पेशख्वानी की। इसके बाद सैयद हैदर आब्दी के आवास से ताजिया और अलम के साथ जुलूस निकाला गया, जो निर्धारित मार्गों से होते हुए कर्बला पहुंचा।
जुलूस मार्ग पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों के लोगों ने जगह-जगह सबील लगाकर शर्बत और पेयजल की व्यवस्था की, जिससे गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सौहार्द की मिसाल देखने को मिली। जुलूस में स्थानीय अंजुमन के अलावा अंजुमन गुलामाने ख्वाजा पहेतिया के सदस्यों ने नौहाख्वानी, मातम और सीनाजनी की। श्रद्धालु पूरे मार्ग में “या अली”, “या हुसैन”, “या अब्बास” और “हाए सकीना” के नारों के साथ शहीद-ए-कर्बला को याद करते हुए आगे बढ़ते रहे।
चहल्लुम पर नम आंखों से याद किए गए हजरत इमाम हुसैन, सादात में निकला ताजिया व अलम का जुलूस
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