सोनभद्र (ओबरा) तारीख 26 जून, 2026
ओबरा (सोनभद्र)। ओबरा नगर पंचायत में विकास और सौंदर्यीकरण के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई और टैक्स के पैसों का किस कदर दुरुपयोग हो रहा है, इसका एक जीता-जागता उदाहरण नगर के प्रमुख चौराहों पर देखा जा सकता है। शहर को सुंदर बनाने के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये की लागत से जगह-जगह वाटर फाउंटेन (पानी के फव्वारे) तो खड़े कर दिए गए, लेकिन आज रखरखाव के अभाव और प्रशासनिक उदासीनता के कारण ये फाउंटेन महज सफेद हाथी (शोपीस) साबित हो रहे हैं।
नगर के सबसे व्यस्त और मुख्य ठिकानों पर लगे वाटर फाउंटेन आज पूरी तरह बंद पड़े हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं। शारदा मंदिर चौराहा,
डिग्री कॉलेज चौराहा, गजराज नगर चौराहा, चिल्ड्रेन पार्क के सामने, जमीनी हकीकत यह है कि इन सभी वीआईपी जगहों पर बने वाटर फाउंटेन ज्यादातर समय पूरी तरह बंद रहते हैं। स्थानीय नागरिकों का सीधा आरोप है कि हफ्ते में कभी-कभार केवल दिखावे और अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की फोटोबाजी के लिए इन्हें कुछ घंटों के लिए चालू किया जाता है और उसके बाद दोबारा बंद कर दिया जाता है। ऐसे में जनता पूछ रही है कि जब इन्हें नियमित चलाना ही नहीं था, तो जनता के पैसों को पानी की तरह क्यों बहाया गया। लाखों-करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद इन फव्वारों का शोपीस बन जाना यह साफ इशारा करता है कि टेंडर प्रक्रिया से लेकर इसके निर्माण और रखरखाव तक में भारी लापरवाही बरती गई है। सरकारी धन का उपयोग ओबरा के वास्तविक और बुनियादी विकास (सड़क, पानी, बिजली) के लिए होना चाहिए था, न कि केवल कागजी और दिखावे की सुंदरता दिखाकर बजट ठिकाने लगाने के लिए। इस फिजूलखर्ची और जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी को लेकर अब नगर के प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं में गहरा रोष व्याप्त है।
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए ओबरा क्षेत्र के सजग नागरिकों और वरिष्ठ पत्रकार बंधुओं ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं। वाटर फाउंटेन के निर्माण में कुल कितना सरकारी धन खर्च हुआ है और इसकी टेंडर प्रक्रिया क्या थी, इसका पूरा ब्यौरा जनता के सामने सार्वजनिक किया जाए। बंद पड़े और घटिया रखरखाव वाले इन फाउंटेन की जिम्मेदारी तय की जाए और लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों व ठेकेदारों पर तत्काल सख्त विभागीय कार्रवाई हो। पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराकर इसमें हुए भ्रष्टाचार और घपले को उजागर किया जाए। नगर पंचायत द्वारा इन सभी फाउंटेन के नियमित संचालन और उचित रखरखाव की एक स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि सरकारी पैसे का सही उपयोग दिख सके। यदि आप भी मानते हैं कि ओबरा नगर पंचायत में जनता के टैक्स के पैसों की यह बर्बादी बिल्कुल गलत है और इसके खिलाफ आवाज उठनी चाहिए, तो इस खबर को फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर पर अधिक से अधिक शेयर करें ताकि जिला प्रशासन (जिलाधिकारी सोनभद्र) और उच्चाधिकारियों की नींद टूटे और ओबरा की जनता को उनके टैक्स के पैसे का सही हिसाब मिल सके।
ओबरा नगर पंचायत में सौंदर्यीकरण के नाम पर जनता के पैसों की खुली बर्बादी, शोपीस बने लाखों-करोड़ों के वाटर फाउंटेन
Related Posts
Add A Comment

