वाराणसी के काशी हिंदू विश्वविद्यालय में डॉक्टर सुनील कुमार उपवास रखते हुए कहा शास्त्रों में कहा गया है कि दूषित व्यक्ति का अन्न-जल ग्रहण करने से मन दूषित होता है। यदि दूषित व्यक्ति के द्वारा भगवान को भोग लगाया जायेगा, तो भगवान भी रूष्ट होंगे। ईश्वर की सदकृपा के बिना जीवन में सफलता संभव नहीं है। दक्षिण भारत के प्रान्तों में नास्तिक परम्परा के लोग सरकार के गलत निर्णय या पक्षपातपूर्ण निर्णय से मंदिरों में घुसाए गए। आन्ध्रप्रदेश के जगनमोहन रेड्डी के शासनकाल में ऐसा मामला प्रकाश में आया था। केरल से भी इस तरह की खबरें आती रही हैं। राजनेताओं के नाम से उनकी आस्था का पता नहीं चलता, पर पक्षपातपूर्ण निर्णय आने पर मतदाता ठगा महसूस करते हैं; मतदाता के धार्मिक मान्यताएँ और आस्था को चोट पहुंचती है।
यह तथ्य सर्वविदित है कि राम और कर्ण एक नहीं हैं। इसी तरह वेदव्यास और वाल्मीकि, हनुमान और कालनेमि, भगवान परशुराम और शुक्राचार्य, भगवान जगन्नाथ और जहन्नुम, भगवान विश्वनाथ और विश्वनाथ, कृष्ण और कलियनाग; एक नहीं हैं। साजिशन, यह अंतर मिट जाने से लोगों की सोच में विष भर गया है जो कि पूरे विश्व में परिलक्षित है।
तमिलनाडु के मामले में भी ऐसा ही हुआ है। राम और कर्ण दोनों सूर्यवंशी हैं। परन्तु भगवान राम ने अधर्म को हटाकर धर्म की स्थापना की, जबकि कर्ण अधर्मी का परम मित्र था और उसी के लिए लड़ा । यहाँ खलनायक को नायक की तरह प्रस्तुत कर जनता को छला गया। भावा वेश का दोहन हुआ है जो हुआ सो हुआ। परन्तु इस तरह का छल बार-बार न हो, इस तरह के दुर्घटना की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए जनजागरण आवश्यक है। मीडिया एक स्वतंत्र इकाई है। इसके माध्यम से समाज तक यह तथ्य पहुँचे। इसी उद्देश्य को लेकर डॉ. सुनील कुमार, सहप्राध्यापक, कम्युनिटी मेडिसिन विभाग, चिकित्सा विज्ञान संस्थान , काशी हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी, उत्तर प्रदेश, भारत; के द्वारा उपवास रखा गया है। डॉ. सुनील कुमार स्वास्थ्य के आध्यात्मिक पहलू पर दो दशकों से अध्ययन करते आ रहे हैं और नाम तथा रूप बदलकर हो रहे आध्यात्मिक हेरा फेरी रोकना चाहते हैं , क्योंकि यह व्यक्ति का तन, मन और धन तीनों बर्बाद कर रहा है
दक्षिण भारतीय मंदिरों में नास्तिक व्यक्तियों द्वारा पूजा पाठ करने पर किया उपवास
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