Close Menu
Voice India News
  • होम
  • अंतराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • वाराणसी
  • राज्य
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • दिल्ली
    • बिहार
  • अपराध
  • मनोरंजन
  • पूर्वांचल
  • खेल
  • शिक्षा
  • फोटो गैलरी
  • लोकसभा चुनाव 2024
What's Hot

मिशन शक्ति 5.0 के तहत बलिया पुलिस ने चलाया जागरूकता अभियान, महिलाओं को किया सशक्तिकरण के प्रति प्रेरित

Friday, 5 June 2026, 19:24 IST

विश्व पर्यावरण दिवस पर बलिया पुलिस ने चलाया “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान

Friday, 5 June 2026, 19:23 IST

तलवार की धार से भी तेज होती है कलम की वार : सैयद सेराज अहमद ( लेखक, पत्रकार)

Friday, 5 June 2026, 19:22 IST
Facebook X (Twitter) Instagram
Facebook X (Twitter) Instagram
Voice India NewsVoice India News
Contact Us
  • होम
  • अंतराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • वाराणसी
  • राज्य
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • दिल्ली
    • बिहार
  • अपराध
  • मनोरंजन
  • पूर्वांचल
  • खेल
  • शिक्षा
  • फोटो गैलरी
  • लोकसभा चुनाव 2024
Voice India News
Home » नए भारत के दिल की धड़कनों में बसते हैं बिरसा- श्रीमती रंजना चोपड़ा
वाराणसी

नए भारत के दिल की धड़कनों में बसते हैं बिरसा- श्रीमती रंजना चोपड़ा

adminBy adminFriday, 5 June 2026, 19:17 ISTNo Comments7 Mins Read
Facebook Twitter WhatsApp LinkedIn Telegram Pinterest Tumblr Reddit Email
Share
Facebook WhatsApp Twitter LinkedIn Pinterest Email Copy Link

भारत जब अपने स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानियों को याद करता है तब छोटानागपुर के जंगलों से एक नाम अपनी दृढ़ नैतिक ताकत के साथ उभरता है। यह नाम भगवान बिरसा मुंडा का है जिन्हें ‘धरती आबा’ यानी भूमि के रक्षक के रूप में पूजा जाता है। वह एक ऐतिहासिक हस्ती से आगे बढ़ कर गरिमा, प्रतिरोध और जनजातीय आत्मसम्मान के जीवंत प्रतीक भी हैं। उनकी सोच थी कि जनजातीय पहचान की रक्षा की जाए, समानता सार्थक हो और विकास आम जन तक न्याय के साथ पहुंचे। उनका यह सिद्धांत अब भी विकसित भारत की ओर देश की यात्रा को निर्देशित करता है। राष्ट्र ने पिछले 12 वर्षों में समावेशी विकास पर नए सिरे से बल दिया है। बिरसा मुंडा के सिद्धांत आज भी नए भारत की नीतियों, शासन और आकांक्षाओं को आकार दे रहे हैं।
विरासत को मिला उसका सही स्थान
भगवान बिरसा मुंडा की विरासत देश भर में जनजातीय समुदायों के गीतों, आख्यानों, सामूहिक यादों में लंबे समय से जिंदा है। माननीय प्रधानमंत्री ने 2021 में बिरसा मुंडा के जन्म दिवस 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस घोषित कर उनकी विरासत को राष्ट्रीय मान्यता दी। इस मान्यता को और गहराई देते हुए बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर 15 नवंबर 2024 से 15 नवंबर 2025 तक जनजातीय गौरव वर्ष मनाया गया। इस दौरान जनजातीय गौरव और विरासत के जश्न में समूचे राष्ट्र में 2 लाख से ज्यादा कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनकी पहुंच 3 करोड़ से अधिक नागरिकों तक रही।
देश भर में, इन आयोजनों ने जनजातीय जीवन की समृद्धि और विविधता को प्रदर्शित किया। नागालैंड के हॉर्नबिल महोत्सव और केरल के जनजातीय साहित्यिक महोत्सव से लेकर, झारखंड के राष्ट्रीय जनजातीय फिल्म महोत्सव और तेलंगाना की ‘कैनो स्प्रिंट चैम्पियनशिप’ (डोंगी चालन प्रतियोगिता) तक, इन कार्यक्रमों ने जनजातीय संस्कृति, रचनात्मकता, खेल और लोककथाओं को राष्ट्रीय पटल पर खड़ा किया। कुल मिलाकर, इनमें अलग-अलग संस्कृतियों और समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले 11 लाख से अधिक जनजातीय नागरिकों की भागीदारी देखी गई। ये आयोजन इस बात की घोषणा थे कि आधुनिक भारत को आकार देने में जनजातीय विरासत एक जीवंत और सक्रिय शक्ति है।
जनजातीय सशक्तिकरण और समावेशन की दिशा में पिछले बारह वर्षों के निरंतर और केंद्रित राष्ट्रीय प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए, ‘जनजातीय गरिमा उत्सव 2026’ इस गति को चार विषयगत सप्ताहों के माध्यम से आगे ले जा रहा है, जो मिलकर जनजातीय विकास के संपूर्ण आयाम को दर्शाते हैं। विशेष रूप से इसका तीसरा सप्ताह भारत के भविष्य से जुड़े एक बेहद महत्वपूर्ण प्रश्न पर केंद्रित है: हम उन व्यक्तियों और समुदायों को कैसे पहचानें जिन्होंने इस राष्ट्र को आकार दिया और हम आने वाली पीढ़ी को उस विरासत को आगे बढ़ाने के लिए कैसे सशक्त बनाएं?
इतिहास में विस्मृत नामों की पुनर्स्थापना
इस प्रश्न का उत्तर तलाशने की शुरुआत उन अनेक जनजातीय नायकों को पहचान देने से होती है, जिनका योगदान बहुत लंबे समय तक मुख्यधारा के ऐतिहासिक आख्यानों से गायब रहा। देश के जनजातीय क्षेत्रों में, शिक्षकों, कलाकारों, पारंपरिक चिकित्सकों और समाज सुधारकों की पीढ़ियों ने इन समुदायों को संजो कर रखा है और उनकी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखा है। उनकी कहानियाँ भारत की राष्ट्रीय स्मृति में एक सही और न्यायसंगत स्थान की हकदार हैं और उनके इन योगदानों को दस्तावेजों में दर्ज करने तथा उन्हें याद रखने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
देश भर के जनजातीय अनुसंधान संस्थान (टीआरआई) मौखिक इतिहास का दस्तावेजीकरण करने, स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों को रिकॉर्ड करने और जनजातीय भाषाओं व सांस्कृतिक परंपराओं को संरक्षित करने के प्रयास में एक केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में, 26 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों के 29 जनजातीय अनुसंधान संस्थान इस कार्य में जुटे हुए हैं, जिसके तहत 222 जनजातीय भाषाओं में 355 का प्रारंभिक दस्तावेजीकरण किया जा चुका है। ये प्रयास भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य सांस्कृतिक ज्ञान को संजोकर रखने में मदद कर रहे हैं।
राष्ट्रीय विमर्श में जनजातीय आवाज़ों को फिर से स्थापित करने का प्रयास ‘जनजातीय स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालयों’ के माध्यम से भी आकार ले रहा है, जिनकी परिकल्पना स्मृति और पहचान के स्थलों के रूप में की गई है। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में जनजातीय समुदायों की भूमिका को सम्मानित करने के लिए 10 राज्यों में ऐसे 11 संग्रहालयों को मंज़ूरी दी है। इनमें से चार संग्रहालयों का उद्घाटन पहले ही किया जा चुका है, जिनमें रांची में भगवान बिरसा मुंडा और नवा रायपुर में शहीद वीर नारायण सिंह को समर्पित संग्रहालय शामिल हैं। इन संस्थानों के जरिए जनजातीय वीरों की गाथाओं के दस्तावेजीकरण और उन पर आधारित कार्यक्रमों के आयोजन से इन्हें भारत की सामूहिक ऐतिहासिक याद में स्थाई रूप से पिरोया जा रहा है।
मशाल थामने वालों को सशक्तिकरण
अतीत को सम्मानित करने के साथ ही, यह यात्रा स्वाभाविक रूप से वर्तमान पीढ़ी को सशक्त बनाने की ओर बढ़ती है। यह बदलाव उन जनजातीय छात्रों की बढ़ती संख्या में सबसे स्पष्ट रूप से दिखाई देता है, जिन्हें मंत्रालय के छात्रवृत्ति कार्यक्रमों का लाभ मिल रहा है। अकेले चालू वर्ष में ही, पांच छात्रवृत्ति योजनाओं के तहत 26,01,979 जनजातीय छात्रों को सहायता प्रदान की गई है, जिसके लिए कुल 3825.54 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है। इनमें से कई छात्र अपने परिवारों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले पहले व्यक्ति हैं, जो न केवल अपनी व्यक्तिगत आकांक्षाओं को, बल्कि पूरे समुदाय की आशाओं को आगे बढ़ा रहे हैं। विशेष बात यह है कि वर्तमान छात्रवृत्ति लाभार्थियों में से 56% से अधिक महिलाएं हैं।
एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों (ईएमआरएस) का विस्तार भी शिक्षा तक पहुँच और अवसरों के प्रति इसी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। स्वीकृत ईएमआरएस संस्थानों की संख्या वर्ष 2013-14 के 167 से बढ़कर वर्ष 2025-26 में 723 हो गई है, जो 330% से अधिक की वृद्धि है – जबकि इसी अवधि के दौरान पहले से चल रहे स्कूलों की संख्या 123 से बढ़कर 499 हो गई है। छात्रों के नामांकन में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है, जो 0.34 लाख से बढ़कर 1.56 लाख छात्र हो गई है। जनजातीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण आवासीय शिक्षा प्रदान करके, ईएमआरएस संस्थान मजबूत शैक्षिक नींव तैयार करने और देश भर के जनजातीय बच्चों के लिए अवसरों का विस्तार करने में मदद कर रहे हैं।
ये आंकड़े केवल योजनाओं के विस्तार को ही नहीं दर्शाते; बल्कि ये एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं। छात्रवृत्तियाँ और फेलोशिप वास्तव में आत्मविश्वास, प्रतिनिधित्व और नेतृत्व में किया जाने वाला निवेश हैं। हमारी प्रतिबद्धता अडिग है: किसी भी आदिवासी छात्र को भौगोलिक स्थिति, पृष्ठभूमि या शिक्षण संस्थानों तक सीमित पहुँच के कारण अवसरों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।
महिला सशक्तिकरण की सबसे सच्ची अभिव्यक्ति
शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे इस बदलाव के साथ-साथ, जनजातीय महिलाओं के नेतृत्व में भी जमीनी स्तर पर एक महत्वपूर्ण बदलाव आ रहा है। पीढ़ियों से, जनजातीय महिलाएं अपनी संस्कृति, प्राकृतिक संसाधनों और सामुदायिक जीवन की मूक संरक्षक रही हैं – वे परिवारों और परंपराओं को सहेजती आई हैं। भारत में लगभग 5.20 करोड़ जनजातीय महिलाएं हैं, जो कुल जनजातीय आबादी का लगभग आधा हिस्सा हैं। समावेशी विकास में उनका नेतृत्व अब मुख्य भूमिका निभा रहा है।
वर्तमान में, 4,712 वन धन विकास केंद्र स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 3,365 कार्यरत हैं। इनसे 12.9 लाख से अधिक लोग लाभान्वित हो रहे हैं और इन लाभार्थियों में आधे से अधिक संख्या महिलाओं की है। ये प्रयास एक ओर जहाँ जमीनी स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर जनजातीय महिलाओं के लिए व्यापक आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं।
आगे बढ़ती हुई विरासत
समारोह, स्मरण, शिक्षा और महिला नेतृत्व मिलकर एक बड़ी और निरंतर आगे बढ़ने वाली कहानी का हिस्सा बनते हैं—एक ऐसी कहानी, जिसमें जनजातीय समुदाय आत्मविश्वास और सम्मान के साथ भारत के भविष्य को नया आकार दे रहे हैं। ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ और ‘प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा अभियान’ जैसी पहलों के माध्यम से, समन्वय और सहयोग के नए प्रतिमान के ज़रिए जमीनी स्तर पर क्रांतिकारी बदलाव आ रहा है। जनजातीय विद्वानों का उभरना, गुमनाम नायकों की पहचान और जनजातीय महिलाओं का बढ़ता नेतृत्व, यह सब मिलकर इस बात को दर्शाता है कि भगवान बिरसा मुंडा की विरासत आज के आधुनिक भारत में भी जीवंत है।
आज, भारत के 10.5 करोड़ से भी ज़्यादा आदिवासी नागरिक, देश की कहानी का एक सबसे प्रभावशाली और प्रगतिशील अध्याय हैं। वे राष्ट्रीय प्रगति के हाशिए पर नहीं हैं, बल्कि ‘विकसित भारत’ के संकल्प में सबसे मजबूत योगदान देने वालों में से हैं — जहाँ विद्वान नए कीर्तिमान रच रहे हैं, महिलाएँ नेतृत्व की नई परिभाषा गढ़ रही हैं और गुमनाम नायकों को आखिरकार राष्ट्रीय पहचान मिल रही है। इस यात्रा में, ‘धरती आबा’ की विरासत आगे बढ़ रही है।

Views: 8
crime latest news news up voice india news voice news india
Share. Facebook Twitter WhatsApp Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
Previous Articleसंवेदनशील अधिकारी एसीपी संजीव कुमार शर्मा का तबादला अलीगढ़, रोहनिया सर्किल में छाई मायूसी
Next Article योगी आदित्यनाथ के जन्मदिवस पर 440 यूनिट रक्तदान युवाओं ने दिखाई सेवा भाव

Related Posts

मिशन शक्ति 5.0 के तहत बलिया पुलिस ने चलाया जागरूकता अभियान, महिलाओं को किया सशक्तिकरण के प्रति प्रेरित

Friday, 5 June 2026, 19:24 IST

विश्व पर्यावरण दिवस पर बलिया पुलिस ने चलाया “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान

Friday, 5 June 2026, 19:23 IST

तलवार की धार से भी तेज होती है कलम की वार : सैयद सेराज अहमद ( लेखक, पत्रकार)

Friday, 5 June 2026, 19:22 IST
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Top Posts

मतदाता सूची में भारी अनियमितताओं का आरोप, जिला अधिकारी को सौंपा गया ज्ञापन

Tuesday, 2 June 2026, 16:40 IST2 Mins Read

बढ़ती बिजली, पेट्रोल-डीजल दरों से फर्नीचर व्यापार मंदी की आशंका में, वाराणसी फर्नीचर मंडल ने जताई चिंता

Tuesday, 2 June 2026, 15:15 IST2 Mins Read

वाराणसी टूरिज्म संगठन ने मनाया अपना स्थापना दिवस

Tuesday, 2 June 2026, 15:06 IST2 Mins Read

Subscribe to Updates

Get the latest sports news from SportsSite about soccer, football and tennis.

Advertisement
Demo

Our Head Office → Flat No - 287, New Colony, Tilampur, Ashapur, Sarnath, Varanasi, 221007, Ph No - 9219824500, Mail us - manishupadhyaybhu@gmail.com

Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
Top Insights

मिशन शक्ति 5.0 के तहत बलिया पुलिस ने चलाया जागरूकता अभियान, महिलाओं को किया सशक्तिकरण के प्रति प्रेरित

Friday, 5 June 2026, 19:24 IST

विश्व पर्यावरण दिवस पर बलिया पुलिस ने चलाया “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान

Friday, 5 June 2026, 19:23 IST

तलवार की धार से भी तेज होती है कलम की वार : सैयद सेराज अहमद ( लेखक, पत्रकार)

Friday, 5 June 2026, 19:22 IST
Get Informed

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2026 Voice India News. Designed by Hoodaa.
  • होम
  • अंतराष्ट्रीय
  • राष्ट्रीय
  • वाराणसी
  • राज्य
    • उत्तरप्रदेश
    • उत्तराखंड
    • दिल्ली
    • बिहार
  • अपराध
  • मनोरंजन
  • पूर्वांचल
  • खेल
  • शिक्षा
  • फोटो गैलरी
  • लोकसभा चुनाव 2024

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.