ओबरा (सोनभद्र)। नगर पंचायत ओबरा में कथित वित्तीय अनियमितताओं, शासन के आदेशों की अवहेलना तथा माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन से जुड़े मामले में एक नया मोड़ आ गया है। शिकायतकर्ता ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक विस्तृत अनुस्मारक (रिमाइंडर) भेजकर इस पूरे प्रकरण में तत्काल हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। अनुस्मारक में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि उत्तर प्रदेश शासन के नगर विकास अनुभाग-1 द्वारा 15 मई 2026 को ही जिलाधिकारी (सोनभद्र) को कड़े निर्देश जारी किए गए थे। शासन ने स्पष्ट कहा था कि इस शिकायत की सक्षम स्तर से जांच कराकर, स्पष्ट संस्तुति सहित तथ्यात्मक आख्या तत्काल शासन को उपलब्ध कराई जाए। शासन के इस कड़े रुख और निर्देश के बावजूद आज तक जांच रिपोर्ट शासन को नहीं भेजी गई है। महीनों बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट का लंबित रहना पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रहा है।मामले के शिकायतकर्ता राकेश केशरी ने स्थानीय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जांच रिपोर्ट में हो रहा यह असामान्य विलंब शासन की मंशा के बिल्कुल विपरीत है। उन्होंने आशंका जताई है कि इस कछुआ गति के पीछे निष्पक्ष जांच को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है।यदि इस मामले में समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो दोषियों को बचाने का पूरा मौका मिल जाएगा।जांच में हो रही देरी से मामले में लीपापोती करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। मुख्यमंत्री को भेजे गए अनुस्मारक में याद दिलाया गया है कि उत्तर प्रदेश सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। ऐसे में शासन के इतने स्पष्ट और कड़े निर्देशों के बावजूद जांच रिपोर्ट को दबाकर बैठना, इस नीति की मूल भावना को सीधी चुनौती देना है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस ढुलमुल रवैए से आम जनता के बीच प्रशासन और सरकार की साख प्रभावित हो सकती है। राकेश केशरी ने सूबे के मुखिया से इस संवेदनशील मामले में तुरंत संज्ञान लेने का अनुरोध करते हुए निम्नलिखित मांगें रखी हैं। जांच रिपोर्ट भेजने में हुए इस अकारण विलंब के लिए जिलाधिकारी से स्पष्टीकरण मांगा जाए।किसी उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष एजेंसी या अधिकारी की निगरानी में जांच को समयबद्ध तरीके से पूरा कराकर रिपोर्ट तुरंत लखनऊ (शासन) भेजी जाए। जांच में जो भी अधिकारी, कर्मचारी या संबंधित व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके विरुद्ध तत्काल कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाए। शिकायतकर्ता ने अंत में उम्मीद जताई है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार विरोधी नीति के अनुरूप इस प्रकरण में शीघ्र, निष्पक्ष एवं प्रभावी कार्रवाई होगी, जिससे न्याय व्यवस्था और शासन पर आम जनता का विश्वास और अधिक सुदृढ़ होगा।
नगर पंचायत ओबरा प्रकरण में जांच रिपोर्ट दबाने का आरोप, मुख्यमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
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