सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले से महिला सशक्तिकरण की एक ऐसी अनूठी और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने साबित कर दिया है कि यदि हौसला बुलंद हो और सही मार्गदर्शन मिले, तो परिस्थितियां चाहे जितनी भी विपरीत हों, सफलता की नई इबारत लिखी जा सकती है। करमा ब्लॉक स्थित सरौली गांव की रहने वाली 27 वर्षीय हेमा कुमारी आज न केवल खुद आत्मनिर्भर बन चुकी हैं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बनकर उभरी हैं। जिसके सामने कभी खुद का परिवार चलाने का गंभीर संकट था, वह महिला आज 20 लोगों को सीधे रोजगार दे रही है। हेमा कुमारी एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखती हैं। एक समय था जब आर्थिक तंगी के कारण परिवार का भरण-पोषण करने के लिए उन्हें मजदूरी तक करनी पड़ती थी। लेकिन उन्होंने इस तंगी के आगे घुटने नहीं टेके। उनके जीवन में टर्निंग पॉइंट तब आया जब वे सत्य आजीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) ने हेमा के भीतर छिपी उद्यमशीलता को पहचाना। मिशन की ओर से उन्हें फर्नीचर बनाने का पेशेवर प्रशिक्षण दिलाया गया और व्यवसाय शुरू करने के लिए 20 हजार रुपये का शुरुआती ऋण (लोन) उपलब्ध कराया गया। ऋण मिलने के बाद हेमा ने अपने पति धर्मेंद्र प्रजापति के साथ मिलकर घर पर ही लकड़ी के आकर्षक फर्नीचर बनाना शुरू किया। शुरुआत में वे इन फर्नीचरों को स्थानीय बाजारों में बेचती थीं। धीरे-धीरे उनके काम की फिनिशिंग और मजबूती के कारण बाजार में मांग बढ़ने लगी, जिससे हेमा का आत्मविश्वास और मजबूत होता गया। शुरुआत में बहुत कठिनाइयां थीं, लेकिन एनआरएलएम (NRLM) ने कदम-कदम पर मेरा साथ दिया। समय-समय पर वित्तीय मदद देने के साथ-साथ उन्होंने मुझे बिजनेस मैनेजमेंट (व्यवसाय प्रबंधन) और मार्केटिंग (विपणन) की बारीकियां भी सिखाईं। आज हेमा कुमारी के बनाए फर्नीचरों की मांग इतनी बढ़ चुकी है कि उन्होंने काम को समय पर पूरा करने के लिए 20 कुशल कारीगरों को काम पर रखा है। जो हेमा कभी खुद रोजगार की तलाश में भटकती थीं, आज वे 20 परिवारों के चूल्हे जलने का जरिया बनी हुई हैं। कभी मुश्किल से गुजर-बसर करने वाली हेमा का बिजनेस आज 20 लाख रुपये के सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुका है। अब वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला पा रही हैं और उनका परिवार एक खुशहाल जीवन जी रहा है। हेमा ने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय उत्तर प्रदेश की योगी सरकार की पारदर्शी नीतियों और प्रशासनिक सहयोग को दिया है। फर्नीचर का कारोबार बढ़ने पर हेमा ने अपनी एक बड़ी दुकान खोल ली। दुकान के विस्तार के लिए एनआरएलएम द्वारा उन्हें 5 लाख रुपये का और ऋण दिया गया। समय पर ऋण चुकाने के बाद, उनकी साख को देखते हुए उन्हें दोबारा 5 लाख रुपये का लोन मिला, जिससे उन्होंने अपनी दुकान में ग्राहकों की मांग के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद भी बेचना शुरू कर दिया है। ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाना ही हमारा मुख्य उद्देश्य है। एनआरएलएम द्वारा महिलाओं का न केवल कौशल विकास किया जाता है, बल्कि उन्हें बाजार की मांग के अनुरूप वित्तीय सहायता और जरूरी प्रशिक्षण भी दिए जाते हैं। जिले की अन्य महिलाओं को भी हेमा से प्रेरणा लेकर आगे आना चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार और एनआरएलएम उनकी हर संभव मदद के लिए तैयार है। हेमा कुमारी की यह कहानी यह साफ बयां करती है कि उत्तर प्रदेश सरकार की मिशन शक्ति और आजीविका योजनाएं जमीनी स्तर पर ग्रामीण महिलाओं की तकदीर और तस्वीर दोनों बदल रही हैं।
फर्नीचर बनाकर हेमा ने छुआ सपनों का आसमान, 20 हजार से शुरू कर अब लाखों का है टर्नओवर
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