बिल्ली मारकुंडी/ओबरा (19 जुलाई 2026)। सोनभद्र की ओबरा तहसील अंतर्गत बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र के खैरटिया में संचालित कथित डी.एस. माइनिंग खदान की मनमानी और सुरक्षा में घोर लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है। खदान द्वारा नियमों को ताक पर रखकर की जा रही हैवी ब्लास्टिंग को लेकर स्थानीय आदिवासी ग्रामीणों और महिलाओं का आक्रोश रविवार को चरम पर पहुंच गया। ग्रामीणों का आरोप है कि रिहायशी बस्ती के बेहद करीब असुरक्षित ढंग से किए जा रहे खनन कार्य से क्षेत्र में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने बताया कि खदान आबादी क्षेत्र से महज 50 मीटर की दूरी पर स्थित है। यहाँ लगातार की जा रही हैवी ब्लास्टिंग के कारण विस्फोट के मलबे और भारी पत्थर सीधे लोगों के घरों पर गिर रहे हैं। इससे न केवल मकानों की दीवारों में दरारें पड़ने का खतरा पैदा हो गया है, बल्कि बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जान भी लगातार जोखिम में बनी हुई है। रविवार को भी ब्लास्टिंग के दौरान एक स्थानीय निवासी के घर पर भारी पत्थर गिरने की घटना हुई। इस सूचना के बाद क्षेत्र की बड़ी संख्या में आदिवासी महिलाएं लामबंद होकर सीधे खदान परिसर पहुंच गईं और प्रबंधन के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। ग्रामीणों का दावा है कि उग्र विरोध प्रदर्शन और महिलाओं की भारी भीड़ को देखकर खदान के जिम्मेदार फोरमैन, ब्लास्टर और अन्य कर्मचारी काम बंद कर मौके से रफूचक्कर हो गए। भागने की हड़बड़ी में कर्मचारी मौके पर 250 से अधिक बारूद से भरे ड्रिल होल और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री लावारिस हालत में छोड़ गए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह आरोप शत-प्रतिशत सही है, तो यह खदान की सुरक्षा व्यवस्था और महानिदेशक खान सुरक्षा (DGMS) के नियमों की खुली अवहेलना है। खुले में छूटा बारूद किसी भी समय बड़े विस्फोट या जनहानि का कारण बन सकता था। महिलाओं ने खदान संचालकों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि खदान शुरू होने के पहले दिन से ही इसका विरोध किया जा रहा है, लेकिन अधिकारी कान में तेल डाले बैठे हैं। आरोप यह भी है कि जब भी ग्रामीण अपनी सुरक्षा की गुहार लगाते हैं, तो उन्हें कथित खनन माफियाओं का डर दिखाकर डराया-धमकाया जाता है। नियमों के विपरीत पूरी खदान में न तो सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगाए गए हैं और न ही सुरक्षा घेरा बनाया गया है। रिहायशी इलाकों के संकरे रास्तों से होकर ओवरलोड भारी वाहनों द्वारा पत्थरों का अनियंत्रित परिवहन किया जा रहा है, जिससे स्कूली बच्चों और राहगीरों के कुचले जाने का भय बना रहता है। ग्रामीणों के अनुसार, पूर्व में हुई ब्लास्टिंग के दौरान उड़कर आए पत्थर से एक गाय गंभीर रूप से घायल हो चुकी है, जिसके बाद भी प्रबंधन ने ढर्रा नहीं बदला।
ओबरा तहसील प्रशासन से लेकर जिला मुख्यालय तक कई बार लिखित शिकायतें देने के बाद भी कोई ठोस दंडात्मक कार्रवाई न होने से वनांचल के लोगों में प्रशासन के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि खदान में छूटे गए बारूद और अवैध ब्लास्टिंग की तत्काल निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कर खनन कार्य को तुरंत रोका जाए। इस बड़े विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से देवकली, जीरवंती, परमेश्वरी, गीता, शकुंतला, शांति, भगवती, सुशीला, गुंजा, राजकुमारी, मुन्ना, दुर्गा, अमरजीत सहित भारी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय महिलाएं उपस्थित रहीं।
सोनभद्र ओबरा खैरटिया खदान में सुरक्षा की खुली पोल 250 ड्रिल होल और विस्फोटक छोड़ भागे कर्मचारी, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
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