सोनभद्र के पथरीले और आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों की तकदीर बदलने वाली महत्वाकांक्षी कनहर सिंचाई परियोजना अब हकीकत बनने के बेहद करीब है। जिले की दुद्धी तहसील में निर्माणाधीन इस परियोजना से अगले वर्ष की शुरुआत से ही किसानों के खेतों तक पानी पहुँचने लगेगा। इससे न केवल सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ होगी, बल्कि क्षेत्र का वर्षों पुराना पेयजल संकट भी हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा। यह परियोजना काफी पहले शुरू हुई थी, लेकिन इसे असली रफ्तार सूबे की योगी सरकार के कार्यकाल में मिली। सरकार की प्राथमिकता को देखते हुए जिला प्रशासन ने भूमि अधिग्रहण से जुड़ी तमाम कानूनी व स्थानीय अड़चनों को युद्ध स्तर पर दूर किया। इसका परिणाम है कि आज जहाँ मुख्य बांध का निर्माण शत-प्रतिशत पूरा हो चुका है, वहीं नहरों का जाल बिछाने का कार्य भी अपने अंतिम चरण में है।
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बताया कि निर्माण कार्य से जुड़े सभी शीर्ष अधिकारियों और कार्यदायी संस्थाओं को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि परियोजना को दिसंबर 2026 के अंत तक हर हाल में पूरा कर लिया जाए। लक्ष्य यह है कि जनवरी 2027 से किसानों को रबी और आगामी फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलना शुरू हो जाए।यह परियोजना मुख्य रूप से कनहर और पांगन नदी के संगम पर स्थित है।वर्षा जल संचयन के लिए यहाँ 3.24 किलोमीटर लंबा और 39.9 मीटर ऊँचा विशाल बांध पूरी तरह बनकर तैयार है।कुल स्वीकृत लागत ₹3394.65 करोड़ (द्वितीय पुनरीक्षित लागत) सिंचाई क्षमता (प्रति वर्ष) 35,467 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र पेयजल का लाभ लगभग 2 लाख की स्थानीय आबादी को नहर प्रणाली की कुल लंबाई 248.810 किलोमीटर (खेतों तक पानी पहुँचाने वाली प्रणाली) मुख्य नहर की लंबाई 57.10 किलोमीटर सोनभद्र जनपद की भौगोलिक स्थिति मुख्य रूप से पठारी है। इस क्षेत्र के अंतर्गत कनहर, पांगन, सुखरी पांगन, लउवा, ठेमा, पाण्डु, गोइठा व धोरपा जैसी नदियों का एक बड़ा नेटवर्क आता है, जिनकी कुल लंबाई लगभग 650 किमी है।
ये नदियां छत्तीसगढ़ के पठारों से निकलकर सोनभद्र के रास्ते सोन नदी में और आगे चलकर पटना में गंगा नदी में मिल जाती हैं। पठारी इलाका होने के कारण वर्षाकाल में इन नदियों का वेग अत्यधिक तीव्र होता था, जिससे करोड़ों लीटर पानी बिना किसी उपयोग के बह जाता था। पथरीली जमीन के कारण भू-गर्भ जल स्तर (Groundwater Level) भी काफी नीचे है, जिससे गर्मियों में यहाँ भयंकर जल संकट खड़ा हो जाता था। लेकिन अब इस विशाल बांध के बनने से वर्षा जल का संचयन (Water Harvesting) सुनिश्चित हो रहा है, जो क्षेत्र के सुनहरे भविष्य की नींव रखेगा।
कनहर निर्माण खंड-3 के अधिशासी अभियंता विनोद कुमार ने बताया कि कनहर बांध का निर्माण अत्याधुनिक और विश्वस्तरीय तकनीक से किया गया है। इसमें सुरक्षा और जल प्रबंधन के विशेष इंतजाम हैं। बांध के स्पिलवे में 16 आधुनिक रेडियल गेट लगाए गए हैं। बांध में पानी का स्तर तय सीमा से अधिक होने पर अलार्म सिस्टम खुद-ब-खुद एक्टिवेट हो जाएगा और गेट आवश्यकतानुसार स्वतः खुल जाएंगे। पानी का स्तर सामान्य होते ही गेट अपने आप बंद भी हो जाएंगे। परियोजना को निर्बाध रूप से चलाने के लिए 1775 मीटर लंबाई का एक्वाडक्ट और 2660 मीटर लंबी सुरंग (Tunnel) का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जो अब अपने अंतिम चरण में है।कनहर सिंचाई परियोजना सोनभद्र के लिए सिर्फ एक बांध नहीं, बल्कि यहाँ के किसानों और नागरिकों की जीवनरेखा (Lifeline) साबित होने वाली है। इसके पूर्ण होने से कृषि उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी, जिससे स्थानीय किसानों की आर्थिक समृद्धता के द्वार खुलेंगे।
अब नहीं होगा पेयजल संकट, सिंचाई को भी मिलेगा भरपूर पानी योगी सरकार में कनहर सिंचाई परियोजना का काम अंतिम चरण में
Related Posts
Add A Comment

