ओबरा, सोनभद्र आशीष मिश्रा। राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ओबरा में शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर एक विशेष स्मरणांजलि एवं जागरूकता कार्यक्रम का भावपूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य वर्ष 1947 में भारत के विभाजन के दौरान विस्थापन, अमानवीय हिंसा और अपने प्रियजनों को खोने वाले लाखों लोगों की अनकही पीड़ा को याद करना तथा युवा विद्यार्थियों में राष्ट्रीय एकता, अखंडता, भ्रातृत्व एवं सामाजिक समरसता की भावना को सुदृढ़ करना था। कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय के प्राचार्य प्रोफेसर (डॉ.) प्रमोद कुमार ने की, जबकि मंच संचालन गणित विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर उपेंद्र कुमार द्वारा कुशलतापूर्वक संपन्न किया गया। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्राचार्य प्रो. (डॉ.) प्रमोद कुमार ने कहा कि 14 अगस्त का दिन भारतीय इतिहास के उस दर्दनाक पन्ने को बयां करता है, जब लाखों लोगों को रातों-रात अपनी मातृभूमि, घर-परिवार और संपत्ति छोड़कर बेघर होना पड़ा था। उन्होंने विचार व्यक्त करते हुए कहा विभाजन केवल भारत के नक्शे और भौगोलिक सीमाओं का बंटवारा नहीं था, बल्कि यह असंख्य परिवारों के बिछड़ने और मानवीय संवेदनाओं की सबसे बड़ी त्रासदी थी। इतिहास को याद करने का हमारा ध्येय किसी के प्रति विद्वेष या नफरत पैदा करना बिल्कुल नहीं है, बल्कि अतीत की गलतियों से सीख लेकर एक शांत, समतामूलक और सौहार्दपूर्ण समाज की नींव मजबूत करना है। कार्यक्रम का संचालन करते हुए गणित विभागाध्यक्ष प्रो. उपेंद्र कुमार ने कहा कि 1947 की त्रासदी मानव इतिहास का वह काला अध्याय है, जिसने पीढ़ियों को प्रभावित किया। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा इतिहास की पीड़ा को नफरत का जरिया बनाने के बजाय शांति, प्रेम और सह-अस्तित्व का माध्यम बनाना चाहिए। युवा देश की रीढ़ हैं, इसलिए उन्हें किसी भी प्रकार की अफवाहों, घृणा फैलाने वाले विचारों और विभाजनकारी प्रवृत्तियों से दूर रहकर सत्य और संवेदना का मार्ग चुनना होगा। निष्पक्ष और भेदभाव-रहित समाज का निर्माण ही विभाजन के शिकार हुए बेकसूर लोगों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी। स्मृति सभा को संबोधित करते हुए वाणिज्य विभाग के डॉ. विकास कुमार, डॉ. विभा पांडेय, हिंदी विभाग की प्रो. प्रेम सुंदरी एवं राजनीति विज्ञान विभाग के डॉ. विनोद बहादुर सिंह ने विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उसके सामाजिक-राजनीतिक प्रभावों पर अपने सारगर्भित विचार रखे। वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि यह दिवस हमें राष्ट्रीय एकता के महत्व का अहसास कराता है। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं के मध्य विभाजन की विभीषिका, विस्थापन की पीड़ा, राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक सद्भाव विषयों पर एक पोस्टर प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों ने अपनी कला के माध्यम से प्रभावी संदेश प्रस्तुत किए। प्रथम स्थान रिंकी ,एम.ए. प्रथम वर्ष, द्वितीय स्थान शिम्पी ,बी.एससी. द्वितीय वर्ष, तृतीय स्थान (संयुक्त)अंशु एवं साहिरा , बी.कॉम. द्वितीय वर्ष (अंशु) / बी.ए. प्रथम वर्ष (साहिरा) कार्यक्रम के अंतिम चरण में महाविद्यालय परिवार, शिक्षकवृंद, कर्मचारियों एवं बड़ी संख्या में उपस्थित छात्र-छात्राओं ने विभाजन की विभीषिका में असमय अपनी जान गंवाने वाले सभी ज्ञात-अज्ञात मृतकों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके पश्चात कार्यक्रम का गरिमापूर्ण समापन हुआ।


