सोनभद्र। जनपद में बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण और धूल (डस्ट) की समस्या से आमजन को निजात दिलाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। शुक्रवार को जिलाधिकारी ने जनपद में चलाए जा रहे विशेष डस्ट नियंत्रण अभियान की न केवल समीक्षा की, बल्कि आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हुए लाइव मॉनिटरिंग के जरिए जमीनी हकीकत का जायजा भी लिया। जिलाधिकारी ने कलेक्ट्रेट सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से जनपद के सबसे अधिक प्रभावित औद्योगिक व शहरी क्षेत्रों— ओबरा, रॉबर्ट्सगंज, डाला और अनपरा में चल रहे डस्ट नियंत्रण कार्यों का सीधा लाइव निरीक्षण किया। इस दौरान लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया गया कि प्रदूषण नियंत्रण शासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, जिसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।प्रशासनिक औपचारिकता से हटकर जिलाधिकारी ने इस लाइव निरीक्षण के दौरान एक अनूठी पहल की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ऑन-स्पॉट जुड़े एंटी-स्मॉग गन (Anti-Smog Gun) वाहनों के ड्राइवरों से जिलाधिकारी ने सीधे बातचीत की।जिलाधिकारी ने लाइव संवाद के दौरान ड्राइवरों से मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जानकारी ली मशीनों का संचालन प्रतिदिन कितने घंटे और किस तकनीक से किया जा रहा है।छिड़काव की अवधि क्या है और पानी रीफिलिंग की क्या व्यवस्था है।क्या स्मोक गन उन सुदूर और संकरे डस्ट प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच पा रही हैं, जहां धूल का गुबार सबसे ज्यादा उड़ता है।प्रतिदिन के कार्य का लॉग-बुक और टारगेट कैसे तय किया जा रहा है।जिलाधिकारी ने मौके पर तैनात फील्ड अधिकारियों को निर्देशित किया कि केवल मुख्य सड़कों पर ही नहीं, बल्कि खनन, परिवहन और घने रिहायशी इलाकों से जुड़े रूटों पर नियमित और प्रभावी छिड़काव सुनिश्चित किया जाए, ताकि आम नागरिकों को तत्काल प्रभाव से वायु प्रदूषण से राहत मिल सके।समीक्षा बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने कड़े शब्दों में कहा कि जनपद में पर्यावरण संरक्षण और वायु गुणवत्ता (Air Quality Index) में सुधार लाना प्रशासन की मुख्य प्रतिबद्धता है। उन्होंने इस अभियान को केवल एक तात्कालिक प्रक्रिया न मानकर एक व्यापक और सतत अभियान के रूप में संचालित करने का खाका खींचा।अधिकारियों को जारी किए गए कड़े दिशा-निर्देश मौके पर तैनात सेक्टोरल और नगर निकाय अधिकारी प्रतिदिन के कार्यों की जीपीएस और वीडियो रिपोर्टिंग सुनिश्चित करेंगे।प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, स्थानीय नगर निकाय, परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन आपस में समन्वय बनाकर ओवरलोड और धूल उड़ाने वाले वाहनों पर भी कार्रवाई करें। किसी क्षेत्र में तय शेड्यूल के अनुसार छिड़काव नहीं पाया गया, तो संबंधित अधिशासी अधिकारी (EO) और जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ तत्काल अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।जिलाधिकारी की इस डिजिटल और लाइव मॉनिटरिंग से स्पष्ट है कि सोनभद्र का जिला प्रशासन अब कागजी दावों के बजाय सीधे जमीनी नतीजों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। आने वाले दिनों में इस सघन अभियान से सोनभद्र की जनता को प्रदूषण और धूल से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सोनभद्र में प्रदूषण के खिलाफ डिजिटल वॉर जिलाधिकारी ने लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से की डस्ट नियंत्रण अभियान की मॉनिटरिंग
Related Posts
Add A Comment

