सोनभद्र। उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले में सोमवार को वित्तविहीन शिक्षक महासभा के तत्वावधान में शिक्षकों और कर्मचारियों ने अपनी लंबी लंबित मांगों को लेकर जोरदार आवाज उठाई। महासभा के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक चार सूत्रीय मांगपत्र जिलाधिकारी सोनभद्र को सौंपा, जिसमें जीविकोपार्जन हेतु सम्मानजनक मासिक मानदेय, सेवा शर्तों का निर्धारण और अन्य वैधानिक सुविधाएं तत्काल प्रदान करने की मांग की गई है। जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में शिक्षकों की बदहाल स्थिति पर गहरा दुख व्यक्त किया गया। महासभा ने कहा कि उत्तर प्रदेश के वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक और कर्मचारी पिछले कई दशकों से बिना किसी नियमित वेतन के अपनी शैक्षणिक सेवाएं दे रहे हैं। शिक्षकों ने याद दिलाया कि 15 अक्टूबर 1986 को जारी अध्यादेश संख्या 6522/15-8-3065/85 में यह स्पष्ट रूप से उल्लेखित था कि वित्तविहीन व्यवस्था केवल प्रयोगात्मक तौर पर 2 वर्षों के लिए लागू की जा रही है और यह कोई स्थायी व्यवस्था नहीं होगी। लेकिन अत्यंत खेदजनक है कि लगभग चार दशक बीत जाने के बाद भी यह अस्थायी व्यवस्था निरंतर जारी है, जिससे हजारों शिक्षक और उनके परिवार गंभीर आर्थिक, सामाजिक और मानसिक संकट झेलने को मजबूर हैं।मांगपत्र में पूर्व के बजटीय प्रावधानों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि वर्ष 2016-17 में प्रदेश सरकार द्वारा सभी विधायी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद शिक्षकों के मानदेय के लिए 200 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था। इसके बाद 12 सितंबर 2016 (शासनादेश संख्या 1157/15-8-2016- 30 23/ 2016) को वितरण नीति भी जारी की गई, लेकिन इस व्यवस्था को इसके मूल उद्देश्य के अनुरूप कभी धरातल पर लागू ही नहीं किया गया। उल्टा इस पर यह प्रतिबंध लगा दिया गया कि इसे भविष्य के लिए दृष्टांत (नजीर) न माना जाए। शासन स्तर पर लगातार प्रत्यावेदन देने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो शिक्षकों को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। माननीय उच्च न्यायालय, लखनऊ खंडपीठ में याचिका संख्या 21635/2021 (जियारत हुसैन एवं अन्य बनाम राज्य सरकार एवं अन्य) दायर की गई, जिसमें 19 जुलाई 2023 को न्यायालय ने आदेश भी पारित कर दिया। इसके बावजूद शासन की ओर से अब तक कोई प्रभावी ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। वित्तविहीन शिक्षकों एवं कर्मचारियों को तुरंत सम्मानजनक मासिक मानदेय प्रदान किया जाए। 15 अक्टूबर 1986 के मूल अध्यादेश की भावना का सम्मान करते हुए वित्तविहीन सरकारी अनुदान सूची (Grant-in-Aid) में लेने की प्रक्रिया शुरू की जाए। इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921 की धारा 16 (च) एवं 16 (छ) के तहत शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवा शर्तों का स्पष्ट निर्धारण किया जाए और उनका कड़ाई से पालन कराया जाए। अन्य नियमित शिक्षकों की भांति वित्तविहीन शिक्षकों को भी चिकित्सीय लाभ, सामाजिक सुरक्षा और सेवा संबंधी सभी वैधानिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। मांगपत्र सौंपने के दौरान महासभा के कई प्रमुख पदाधिकारी और बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद रहे। इसमें मुख्य रूप से डा. राजेंद्र प्रताप सिंह (प्रदेश अध्यक्ष), डा. कृष्ण मोहन यादव (प्रदेश उपाध्यक्ष) डा. सत्य नारायण सिंह परिहार,धनंजय कुमार उपाध्याय (मंडल अध्यक्ष),मुस्तकीन अहमद समेत संगठन के कई अन्य पदाधिकारी एवं शिक्षक-कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में सरकार से मांग की कि शिक्षकों के इस लंबे उत्पीड़न को समाप्त कर जल्द से जल्द न्यायोचित कदम उठाए जाएं।
सोनभद्र वित्तविहीन शिक्षक महासभा ने मानदेय और वैधानिक सुविधाओं को लेकर डीएम को सौंपा 4 सूत्रीय मांगपत्र
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