ओबरा (सोनभद्र)।पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के निर्देशन एवं सोनभद्र पतंजलि के समस्त संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में चल रहे सहयोग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर के 19वें दिन भी साधकों में भारी उत्साह देखने को मिला। कार्यक्रम की शुरुआत पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के मुख्य योग प्रशिक्षक वीरेंद्र योगी, स्थानीय योग शिक्षक लालजी, राम-लखन और राजकुमार द्वारा सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित कर की गई। शिविर के दौरान परम पूज्य श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी महाराज के संदेशों को साझा करते हुए बताया गया कि सरल ढंग से अष्टांग योग का नियमित अभ्यास करने से तन, मन और विचार पूरी तरह स्वस्थ रहते हैं। योग के माध्यम से शरीर की एक-एक कोशिका (Cell) को नई ऊर्जा प्राप्त होती है, जिससे असाध्य रोगों से मुक्ति मिलती है। इस प्रशिक्षण शिविर का मुख्य उद्देश्य नए योग शिक्षक तैयार करना है, जो भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों में योग कक्षाएं संचालित कर सकें। इसका अंतिम लक्ष्य योग, आसन और प्राणायाम के माध्यम से समाज के हर व्यक्ति को स्वस्थ और निरोगी बनाना है। प्रशिक्षण सत्र में वरिष्ठ साधक जीतेन्द्र सिंह ने उपस्थित जनों को हठयोग एवं षट्कर्म के सिद्धांतों से अवगत कराया। उन्होंने बताया किहठयोग के आदि प्रणेता भगवान शिव माने जाते हैं। षट्कर्म की क्रियाएं हमारे स्थूल शरीर का शुद्धिकरण करती हैं, जिससे आंतरिक अंग मजबूत होते हैं।शिविर में साधकों को धोती, बस्ति, नेति, त्राटक, नौली तथा कपालभाति जैसी महत्वपूर्ण यौगिक क्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण शिविर में लगभग 25 नए साधक योग शिक्षक बनने का कड़ा प्रशिक्षण ले रहे हैं। इसके साथ ही, क्षेत्र के पुराने योग शिक्षक और अनुभवी भाई-बहन भी शिविर में पहुंचकर स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं और नए प्रशिक्षुओं का उत्साहवर्धन कर रहे हैं। इस पूरे सत्र का कुशल संचालन ओबरा प्रभारी नरेंद्र सिंह द्वारा किया गया। शिविर को सफल बनाने में योग शिक्षक लालजी, देवेश सिंह, राम-लखन, राजकुमार, सुशील, राजेश शर्मा, घनश्याम सिंह, सुभाष यादव, आनंद, मोहनलाल और संजीव सहित पतंजलि परिवार के अनेक कर्मठ कार्यकर्ताओं ने अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।
ओबरा में पतंजलि योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर का 19वां दिन साधकों ने सीखे हठयोग, षट्कर्म और मधुमेह नियंत्रण के गुर
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