ओबरा, सोनभद्र (26 मई 2026)। पतंजलि योगपीठ हरिद्वार से सम्बद्ध पतंजलि के सभी संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में ओबरा तहसील के चिल्ड्रेन पार्क स्थित योग भवन में आयोजित 25 दिवसीय (20 मई से 15 जून 2026) निःशुल्क सह योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर आज अपने छठे दिन में प्रवेश कर गया। भीषण गर्मी के बावजूद सुबह-सुबह योग भवन में नए योग शिक्षकों और साधकों का उत्साह देखने लायक था। शिविर के छठे दिन के सत्र का शुभारंभ मुख्य अतिथि राजेश शर्मा (युवा एवं योग निष्ठ साधक) ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस दौरान साधिका संध्या और सुमन ने सह-योग करते हुए दीप प्रज्वलन की रस्म पूरी की। प्रशिक्षण सत्र में परम पूज्य श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी महाराज द्वारा प्रतिपादित अष्टांग योग का गहन अभ्यास कराया गया। इसके साथ ही नए योग शिक्षकों को यौगिक जॉगिंग, सूर्य नमस्कार और दंड-बैठक की बारीकियों से अवगत कराया गया।वर्तमान समय की जीवनशैली से उपजी बीमारियों पर चर्चा करते हुए प्रशिक्षकों ने शुगर (मधुमेह) से मुक्ति के लिए सुगमता पूर्वक किए जाने वाले मंडूकासन, कुर्मासन, शशकासन, गोमुख आसन और वक्रासन का व्यावहारिक अभ्यास कराया। वहीं, उच्च रक्तचाप (बीपी) की समस्या से पीड़ित लोगों के लिए अनुलोम-विलोम प्राणायाम का विशेष सत्र आयोजित हुआ। शिविर में उपस्थित मुख्य योग प्रशिक्षक वीरेंद्र योगी जी ने साधकों को ज्ञानगंगा से सराबोर करते हुए बताया कि संपूर्ण ब्रह्मांड का निर्माण पाँच तत्वों— पृथ्वी, अग्नि, वायु, जल और आकाश के संघात से हुआ है। इन पांचों में भी जो तत्व सर्वत्र विद्यमान है, वह ‘प्राण’ है। ऋग्वेद के मंत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा आ वात वाहि भेषज वि वात वाहि यदरपः…अर्थात ऑक्सीजन (प्राणवायु) स्वयं में एक महाऔषधि है। यह जब विविध रूपों में हमारे भीतर प्रवहमान होती है, तो केवल इलाज नहीं करती, बल्कि विश्वभेषज’ यानी पूर्ण चिकित्सा प्रदान करती है। प्राण वास्तव में एक आध्यात्मिक चिकित्सा है। शास्त्रों में कहा गया है— प्राणो है पिता प्राणों माता प्राणो भ्राता… अर्थात प्राण ही माता, पिता, भाई और आचार्य है। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखते हुए कहा कि प्राणायाम के जरिए जब हमारे भीतर प्राण के आयाम बदलते हैं, तो व्यक्ति के मन में गहरा भावनात्मक और मानसिक परिवर्तन आता है। प्राणायाम से विचार शुद्ध होते हैं, जिससे मनुष्य का आहार और व्यवहार स्वतः ही पवित्र हो जाता है।परम पूज्य स्वामी रामदेव जी और श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज के स्वस्थ भारत के सपने को ओबरा के युवा साकार कर रहे हैं। शिविर का मुख्य उद्देश्य देश के युवाओं को गुणवान, धैर्यवान, शीलवान, पुरुषार्थी और चरित्रवान बनाना है।इसी योग की प्रेरणा से प्रभावित होकर ग्राम वैनी का 11 वर्षीय बालक बाबू इतनी छोटी उम्र में पतंजलि योगपीठ हरिद्वार का सदस्य बनकर योग शिक्षक की ट्रेनिंग ले रहा है। उसकी इच्छा भविष्य में योग में ही डिप्लोमा कोर्स कर अपना जीवन देश को समर्पित करने की है। वहीं, डाला रोड निवासी और राज्य स्तरीय योग खिलाड़ी रितिका प्रजापति भी योग में डिप्लोमा कोर्स कर देश स्तर पर पहचान बनाने के उद्देश्य से शिविर में कड़ा अभ्यास कर रही हैं। इन दिनों पड़ रही प्रचंड गर्मी को देखते हुए प्रशिक्षकों ने शरीर को अंदर से ठंडा रखने वाले विशेष प्राणायामों का अभ्यास कराया। साधकों को शीतली प्राणायाम, सीत्कारी प्राणायाम और चन्द्रभेदी प्राणायाम के गुर सिखाए गए। साथ ही कानों के विकारों को दूर करने के लिए कर्णरोगान्तक प्राणायाम का भी अभ्यास कराया गया। इस भव्य प्रशिक्षण शिविर को पतंजलि योग समिति उत्तर प्रदेश (पूर्व) के राज्य प्रभारी श्रद्धेय श्रीभगवान जी और आदरणीय दुर्गेश जी का कुशल मार्गदर्शन प्राप्त हो रहा है। इसके साथ ही राज्य प्रभारी कार्यालय से भाई मार्कंडेय जी और संवाद प्रभारी आदरणीय सुरेंद्र जी का विशेष सहयोग मिल रहा है।शिविर को सफल बनाने में सोनभद्र जिला प्रभारी रवि प्रकाश, सहयोग प्रभारी दिनेश पाठक, शिवपूजन झा, राधा त्रिपाठी जी, आर.एन. गुप्ता जी (रेनुकूट प्रभारी), भाई मयंक जी (घोरावल प्रभारी), राधेश्याम (युवा भारत, दुद्धी), भारत स्वाभिमान के सुशील चौबे व सुनील श्रीवास्तव, ओबरा तहसील प्रभारी राजाराम सिंह और वरिष्ठ शिक्षक घनश्याम सिंह पूरी मुस्तैदी से जुटे हुए हैं।
शिविर में जिला कोषाध्यक्ष जितेंद्र सिंह, राजेश शर्मा और वीरेंद्र योगी द्वारा लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस दौरान प्रशिक्षण ले रहे भाई-बहनों में गीता यादव, शिवांगी, लालजी, देवेश सिंह बबलू, हरिवंश, लल्लन यादव, निशांत, सुनील कुमार श्रीवास्तव, शशिकांत, राजकुमार मास्टर, प्रमोद तिवारी, रमाकांत, अनिल कुमार, केवल, हौसला, राजेश्वर जी, मंजू देवी, रेनू, कुसुम, संध्या, सुमन सहित सैकड़ों योग साधक उपस्थित रहे।पतंजलि परिवार सोनभद्र ने ओबरा नगर के समस्त संभ्रांत नागरिकों, युवाओं और माताओं-बहनों को इस निःशुल्क योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर (ओबरा चिल्ड्रेन पार्क योग भवन) में आने का सादर आमंत्रण दिया है, ताकि लोग योग सीखकर समाज को निरोग बनाने में अपना अमूल्य योगदान दे सकें।
ओबरा में योग क्रांति 25 दिवसीय सह योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर के छठे दिन प्राण तत्व और अष्टांग योग पर मंथन
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