ओबरा/सोनभद्र पतंजलि योगपीठ हरिद्वार से सम्बद्ध पतंजलि के सभी संगठनों के तत्वावधान में सोनभद्र जिले के ओबरा स्थित चिल्ड्रेन पार्क योग भवन में आयोजित 25 दिवसीय सहयोग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर 2026 के पांचवें दिन योग का भव्य सत्र संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि आदरणीय विकास सिंह (युवा कर्मठ समाज सेवी व सभासद प्रतिनिधि) एवं विशिष्ट अतिथि बबलू प्रजापति (जूनियर इंजीनियर, ओबरा परियोजना) द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर ओबरा नगर प्रभारी नरेंद्र सिंह भी उपस्थित रहे, जबकि मंच का कुशल संचालन जिला कोषाध्यक्ष एवं योग प्रशिक्षक जितेंद्र सिंह ने किया। शिविर में लगभग 20 योग शिक्षक भाई-बहन कड़ा प्रशिक्षण ले रहे हैं।प्रशिक्षण शिविर में मुख्य योग प्रशिक्षक योगी वीरेंद्र जी द्वारा संवर्धित प्रशिक्षण देते हुए साधकों को योग आसन, प्राणायाम, सुक्ष्म व्यायाम, यौगिक जॉगिंग और सूर्य नमस्कार का गहन अभ्यास कराया गया। इसके साथ ही खड़े होकर किए जाने वाले आसन, बैठकर किए जाने वाले आसन सहित पेट के बल लेटने वाले आसनों (मकरासन, भुजंगासन, शलभसन, धनुरासन, नौकासन) और पीठ के बल लेटने वाले आसनों (मरकटआसन, पवनमुक्तासन, पादवृतासन, द्विचक्रीकासन, अर्धहलासन) की बारीकियों को सिखाया गया।मुख्य प्रशिक्षक ने बताया कि कपालभाति प्राणायाम से शरीर के वात, पित्त और कफ संतुलित होते हैं, वहीं अनुलोम-विलोम प्राणायाम हमारे नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) को पूरी तरह दुरुस्त रखता है।प्रशिक्षण के दौरान योगी वीरेंद्र जी ने योग से जुड़ी महत्वपूर्ण सावधानियों पर भी प्रकाश डाला यदि कमर में दर्द है, तो आगे झुकने वाले आसन न करें और भारी सामान उठाने से बचें।
हर्निया की शिकायत होने पर पीछे झुकने वाले आसनों का अभ्यास वर्जित है।किसी भी प्रकार के ऑपरेशन (सर्जरी) के छह महीने बाद ही योग प्रशिक्षक की देखरेख में योग शुरू करना चाहिए।
आज के युवाओं को जिम संस्कृति से हटकर योग अपनाने की सलाह देते हुए शिविर में पारंपरिक बलशाली अभ्यासों का प्रदर्शन किया गया। युवाओं के शारीरिक सौष्ठव के लिए आठ प्रकार की बैठक (साधारण, अधबैठक, पूर्ण बैठक, राममूर्ति बैठक, पहलवान बैठक, हनुमान बैठक आदि) और बारह प्रकार के दंड (साधारण दंड, राममूर्ति दंड, हनुमान दंड, वक्षविकासक दंड, वृश्चिक दंड, पार्श्व दंड, चक्र दंड, पलट दंड, शेर दंड, सर्प दंड और मिश्र दंड) का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।मुख्य अतिथि सभासद प्रतिनिधि विकास सिंह ने अपने उद्बोधन में कहा, श्रद्धेय स्वामी बाबा रामदेव जी महाराज के मार्गदर्शन में योग शिक्षक भाई-बहन पूरे भारत के हर वार्ड और मोहल्ले में योग कक्षाएं लगाकर समाज को निरोगी बना रहे हैं। यह एक उत्कृष्ट समाज सेवा है। योगी वीरेंद्र जी और उनका परिवार न केवल सोनभद्र बल्कि विभिन्न राज्यों में जाकर योग की अलख जगा रहा है, जो अत्यंत सराहनीय है। मुझे गर्व है कि हमारे वार्ड संख्या 18 में भी यह योग कक्षा संचालित हो रही है। उन्होंने इस तरह के आयोजनों में हमेशा सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई। विशिष्ट अतिथि जूनियर इंजीनियर बबलू प्रजापति ने अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया, मैं गंभीर कमर दर्द से पीड़ित था। योगी वीरेंद्र जी के संपर्क में आने के बाद मैंने अंबेडकर स्टेडियम में उनके निर्देशन में योग शुरू किया। मात्र एक सप्ताह में मेरा कमर दर्द ठीक हो गया। पिछले 8 महीनों से मैं निरंतर योग कर रहा हूँ। योग वास्तव में एक महान औषधि है। इससे प्रभावित होकर मैं स्वयं पतंजलि योगपीठ का सदस्य बना और अब योग शिक्षक बनकर समाज को जागरूक कर रहा हूँ।यह 25 दिवसीय भव्य शिविर आदरणीय भ्राता दुर्गेश जी (राज्य प्रभारी, उत्तर प्रदेश पूर्व पतंजलि योग समिति) एवं श्रद्धेय भ्राता भगवान जी (राज्य प्रभारी, भारत स्वाभिमान, उत्तर प्रदेश पूर्व) के विशेष नेतृत्व व गरिमामयी निर्देशन में आयोजित किया जा रहा है। शिविर को सफल बनाने में राज्य कार्यालय प्रभारी भ्राता मार्कण्डेय, भाई सुरेंद्र (संवाद प्रभारी), रवि प्रकाश (जिला प्रभारी), दिनेश पाठक (सह जिला प्रभारी), शिवपूजन झा, रामा त्रिपाठी, राधे श्याम जी, मनोज , आर.एन. गुप्ता , अरुण यादव (जिला प्रभारी किसान), युवा प्रभारी मयंक दुबे जी और नरेंद्र सिंह का विशेष योगदान मिल रहा है।कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ योग शिक्षक घनश्याम सिंह द्वारा मुख्य अतिथियों को ज्ञानवर्धक पुस्तकें भेंट कर सम्मानित किया गया।लालजी, देवेश कुमार सिंह, बबलू प्रजापति, राम-लखन शर्मा, हरिवंश, लल्लन यादव, शशि कान्त, सुशील कुमार, राजकुमार, हौसला, राजाराम सिंह, रविंद्र, अजय, नन्दलाल और रामनाथ कोविंद।
बहनें गीता यादव, शिवांगी, मंजू देवी, रेनू और प्रियंका सिंह सहित अनेक साधक उपस्थित रहे। संचालन जितेंद्र सिंह जिला कोषाध्यक्ष ने किया
ओबरा में 25 दिवसीय सहयोग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर के पांचवें दिन योग की विभिन्न विधाओं का प्रदर्शन, जिम से बेहतर हैं पारंपरिक दंड-बैठक
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