हापुड़ (मनीष कुमार) अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस के अवसर पर शेरघाटी के रंगलाल हाई स्कूल मैदान में ‘संविधान सुरक्षा महारैली’ का भव्य आयोजन किया गया। इस विशाल जनसभा में हजारों की संख्या में महिलाओं, पुरुषों और बच्चों ने शिरकत की, जिससे पूरा मैदान ‘जय भीम’ और ‘मजदूर एकता जिंदाबाद’ के नारों से गूंज उठा प्रमुख उपस्थिति और नेतृत्व
कार्यक्रम का उद्घाटन प्रख्यात विद्वान मा. सज्जाद नोमानी ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सतीश दास उपस्थित रहे, जबकि अध्यक्षता प्रो. विलास खरात ने की महिला जागृति फाउंडेशन की राष्ट्रीय अध्यक्षा गीता पैट्रिक ने अपने ओजस्वी संबोधन में बिहार के भूमिहीन परिवारों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा बिहार की धरती पर आज भी लाखों परिवार ऐसे हैं जिनके पास न अपना घर है, न जमीन। संविधान हमें बराबरी का हक देता है, तो फिर यह अन्याय क्यों? हम सरकार से मांग करते हैं कि पुराने कानून को बहाल करते हुए हर गरीब परिवार को 5 डिसमिल जमीन दी जाए।”
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जमीन सिर्फ मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि इंसान की पहचान और सुरक्षा है। यदि गरीबों की यह आवाज नहीं सुनी गई तो यह आंदोलन हर गांव और हर गली तक पहुंचेगा मजदूरों के अधिकारों पर बात करते हुए गीता पैट्रिक ने केंद्र सरकार द्वारा लाए गए चार नए लेबर कोड (Labour Codes) की तीखी आलोचना की। उन्होंने इसे पूंजीपतियों का हितैषी और मजदूरों का शोषक बताया अपने भाषण के समापन पर उन्होंने हजारों की भीड़ को संकल्प दिलाते हुए कहा कि जब मजदूर खड़ा होता है, तो बड़े-बड़े तख्त हिल जाते हैं। उन्होंने सामाजिक न्याय की नई इबारत लिखने और हक मिलने तक संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया।
सभा के अंत में उपस्थित जनसमूह ने हाथ उठाकर संविधान की रक्षा और अपने अधिकारों के लिए एकजुट रहने की शपथ
जब तक हर भूमिहीन को हक नहीं मिलता, तब तक चैन से नहीं बैठेंगे गीता पैट्रिक
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