कोन/सोनभद्र (19 जुलाई 2026)। जनपद सोनभद्र के नव सृजित विकास खंड कोन के अंतर्गत केंद्र व प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। क्षेत्र के लिए स्वीकृत हर्रा कदरा ग्राम समूह पेयजल योजना ग्रामीणों के लिए राहत के बजाय अभिशाप साबित हो रही है। फ्लोरोसिस से बुरी तरह प्रभावित इस वनांचल क्षेत्र में शुद्ध पेयजल उपलब्ध न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने रविवार को कुड़वा में एकत्रित होकर कार्यदायी संस्था और जल निगम के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी की।
ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि कार्यदायी संस्था विष्णु प्रकाश आर पुंगलिया लि. की घोर लापरवाही, तकनीकी खामियों और विभागीय मिलीभगत के कारण धरातल पर योजना पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है, जबकि कागजों पर कोरम पूरा कर लिया गया है। ग्रामीणों ने प्रदर्शन के दौरान बताया कि योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए तैयार की गई जीए ड्राइंग की अनदेखी की गई है। कई ग्राम पंचायतों में धरातल पर नल कनेक्शन का काम आधा-अधूरा है, लेकिन संस्था के रसूखदार कर्मचारियों ने अधिकारियों को गुमराह कर इसे कागजों पर शत-प्रतिशत पूर्ण दिखा दिया है।
क्षेत्र में बिछाई गई डीआई, एचडीपीई और एमडीपीई पाइपलाइन को निर्धारित मानक के अनुसार गहराई में नहीं दबाया गया है। पाइपों की गुणवत्ता इतनी घटिया है कि हल्की बारिश या मामूली दबाव से ही पाइपलाइन आए दिन क्षतिग्रस्त हो जाती है।संस्था ने अपनी गर्दन बचाने के लिए अधिकांश ग्राम प्रधानों और पंचायत की जल समितियों पर दबाव बनाकर जलापूर्ति पूर्ण होने के झूठे प्रमाण पत्र (NOC) जारी करवा लिए और शासन स्तर से करोड़ों रुपये के बजट का बंदरबांट कर लिया।फ्लोरोसिस प्रभावित कचनरवा और कुड़वा जैसे क्षेत्रों में स्थिति बेहद भयावह बनी हुई है। सामाजिक कार्यकर्ता गंगा प्रसाद यादव ने संस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा नदी-नालों और चुआंड (गड्ढों) का दूषित व फ्लोराइड युक्त पानी पीने के कारण यहाँ के युवा समय से पहले बूढ़े दिखाई देने लगे हैं। बच्चों के दांत पीले पड़कर सड़ रहे हैं और लोग फ्लोरोसिस की चपेट में आकर शारीरिक रूप से अपंग हो रहे हैं। कचनरवा के टोला असनाबांध (लिंक रोड वार्ड नंबर 3) में आज तक पानी की एक बूंद नहीं पहुंची। यहां तक कि पानी की टंकी से सटा हुआ बड़ाप गांव भी आज तक कनेक्शन से वंचित है।
इन 32 गांवों में वर्षों से ठप है जलापूर्ति
कचनरवा (असनाबांध वार्ड-3), बड़ाप, मधुरी, नरोइयादामर, रोहिनवादामर, बागेसोती, सिंगा, डुबवा, धौरवादामर, सेमरवादामर, गोबरदाहा, डीलवाहा, शिवाखाड़ी, धीचोरवा, बिछमरवा, केवाल, पीपरखाड़, भालुकूदर, गीधिया, किशुनपुरवा, ललकीदामर, करैइल, रोरवा, खरौंधी, चांचीकला, नकतवार, और बहुआरा सहित लगभग 32 गांवों में पेयजल संकट गहराया हुआ है। ग्रामीणों का आक्रोश इस बात को लेकर भी है कि जब उन्होंने इस अव्यवस्था के खिलाफ ‘मुख्यमंत्री हेल्पलाइन’ पर शिकायत दर्ज कराई, तो विभागीय अधिकारियों ने बिना धरातली जांच किए और बिना कार्य पूरा कराए ही दफ्तर में बैठकर कार्य पूर्ण होने की फर्जी आख्या (रिपोर्ट) लगा दी। इससे साफ है कि इस महाघोटाले में कार्यदायी संस्था के साथ-साथ जल निगम के अधिकारी भी पूरी तरह संलिप्त हैं। ग्रामीणों ने सूबे के मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी से मांग की है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराकर दोषी संस्था को तत्काल ब्लैक लिस्टेड (काली सूची में दर्ज) किया जाए।कोन-विंढमगंज मुख्य मार्ग पर मुख्य (मेन) पाइपलाइन डैमेज हो गई है, जिसके कारण इन क्षेत्रों में जलापूर्ति बाधित हुई है। लोक निर्माण विभाग (PWD) से समन्वय स्थापित कर जल्द ही क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को दुरुस्त करवा दिया जाएगा, जिसके बाद ग्रामीणों को नियमित रूप से शुद्ध पेयजल की आपूर्ति मिलने लगेगी।अब देखना यह होगा कि विभागीय दावों के बाद ग्रामीणों को वास्तव में शुद्ध जल मिल पाता है या देश के शीर्ष नेतृत्व की यह ड्रीम परियोजना सोनभद्र के वनांचल में भ्रष्टाचार के दलदल में ही दफन होकर रह जाएगी।प्रदर्शन में मुख्य रूप से शामिल रहे। समाजसेवी गंगा यादव, जयराम, कलावती देवी सहित भारी संख्या में स्थानीय ग्रामीण महिलाएं और पुरुष।
नदी-नाले का दूषित पानी पीने को मजबूर ग्रामीणों ने किया ज़ोरदार प्रदर्शन
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