रेणुकूट, सोनभद्र (18 जुलाई 2026)। जनपद सोनभद्र में एक ओर जहां जिला प्रशासन और जिलाधिकारी चर्चित गौड़ के कुशल निर्देशन में गांव से लेकर शहरों तक सघन घर-घर सफाई अभियान चलाकर संक्रामक बीमारियों को रोकने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर रेणुकूट नगर पंचायत में इन दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। रेणुकूट नगर पंचायत की घोर लापरवाही और उदासीन कार्यप्रणाली के चलते आज स्थानीय जनता बदबू, कीचड़ और कूड़े के ढेरों के बीच नारकीय जीवन जीने को विवश है। सबसे बदतर और चिंताजनक हालात नगर पंचायत के वार्ड संख्या 11 में देखने को मिल रहे हैं, जहां सफाई व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। स्थानीय नागरिकों और राहगीरों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब नगर पंचायत की अनदेखी के कारण लोगों की अगाध आस्था के केंद्र प्रसिद्ध साईं मंदिर के ठीक सामने कचरे का विशाल टीला खड़ा हो गया। मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भारी बदबू और गंदगी के बीच से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे जनभावनाएं आहत हो रही हैं। इस डंपिंग ग्राउंड नुमा जगह से उठने वाली तीखी बदबू और वायु प्रदूषण के कारण समूचे इलाके में संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य और जान-माल पर सीधा संकट मंडरा रहा है। इस बदहाली का एक और दर्दनाक पहलू यह है कि एक तरफ जहां उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश में ‘गौ रक्षा’ और गौवंश के संरक्षण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं रेणुकूट के इस विशाल कूड़े के ढेर पर दर्जनों बेसहारा गौवंश (गौमाता) दिन-भर मुंह मारते और जहरीला प्लास्टिक व सड़ा-गला कचरा खाने को विवश दिखाई देते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह दृश्य सरकार और नगर पंचायत दोनों के दावों को मुंह चिढ़ा रहा है।वर्तमान मानसून सीजन में हो रही लगातार बारिश ने इस समस्या को कई गुना अधिक भयावह बना दिया है। खुले में पड़े कूड़े के ढेर में पानी पड़ने से वह पूरी तरह सड़ चुका है, जिससे सड़कों पर बदबूदार गंदा पानी और कीचड़ बह रहा है। इस सड़न के कारण मच्छरों, मक्खियों और अन्य हानिकारक कीड़ों का प्रकोप तेजी से बढ़ गया है। वार्ड वासियों को डर है कि यदि समय रहते इसे साफ नहीं किया गया, तो क्षेत्र में मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया और डायरिया जैसी जानलेवा बीमारियां महामारी का रूप ले लेंगी। स्थानीय निवासियों का सीधा आरोप है कि नगर पंचायत की अध्यक्षा स्वयं सत्ताधारी दल (भाजपा) की एक प्रमुख नेत्री हैं, इसके बावजूद उनके अपने ही क्षेत्र में केंद्र और राज्य सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत मिशन की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। क्षेत्रीय नागरिकों और प्रबुद्ध समाजसेवियों में इस बदहाली को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है। नगर पंचायत के विकास प्लान केवल कागजी घोड़ों तक सीमित हैं। टैक्स वसूलने और धन उगाही में तो यह व्यवस्था आगे रहती है, लेकिन जब बुनियादी सुविधाएं देने की बात आती है, तो अधिकारी मुंह मोड़ लेते हैं। सरकारी खजाने से करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए जा रहे हैं, जो जनता के काम आने के बजाय निजी स्वार्थों की भेंट चढ़ रहे हैं। अगर यही कचरा इन आला अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के आलीशान बंगलों के बाहर डाल दिया जाए, तब इन्हें आम जनता का दर्द समझ आएगा। अब देखना यह है कि पूरे जिले में सफाई का ढिंढोरा पीटने वाला जिला प्रशासन रेणुकूट नगर पंचायत के इस वीभत्स रवैये और जनता व बेजुबान पशुओं की सुरक्षा से हो रहे खिलवाड़ पर क्या ठोस दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाता है। नारकीय स्थिति से आजिज आ चुके वार्ड 11 के नागरिकों ने जिलाधिकारी चर्चित गौड़ से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने, साईं मंदिर के सामने से अविलंब कूड़े का टीला हटवाने और क्षेत्र में नियमित रूप से फॉगिंग व एंटी-लार्वा छिड़काव सुनिश्चित कराने की जोरदार मांग की है।
रेणुकूट में स्वच्छता अभियान तार-तार वार्ड 11 और प्रसिद्ध साईं मंदिर के सामने कचरे का अंबार, जिला प्रशासन के दावों को खुली चुनौती
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