खलियारी/सोनभद्र जनपद के विकास खंड नगवां परिसर में सरकारी नियमों को ताक पर रखकर पेड़ बेचने का एक सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है। पिछले दिनों क्षेत्र में आए तेज आंधी-तूफान के कारण ब्लॉक परिसर के भीतर कई विशाल पेड़ धराशायी हो गए थे। अब इन गिरे हुए पेड़ों की कीमती लकड़ियों की बिक्री को लेकर ब्लॉक के आला अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि सरकारी संपत्ति होने के बावजूद, इन पेड़ों की बिना किसी विधिवत कानूनी नीलामी प्रक्रिया के ही चुपके से बंदरबांट कर दी गई।स्थानीय निवासियों और जागरूक नागरिकों का सीधा आरोप है कि सरकारी संपत्ति की बिक्री में पारदर्शिता की धज्जियां उड़ाई गईं। पूरी प्रक्रिया को इतनी गोपनीयता के साथ अंजाम दिया गया कि किसी को भनक तक नहीं लगी। क्षेत्र की जनता ने प्रशासन के सामने कई तीखे सवाल खड़े किए हैं।यदि पेड़ों की बिक्री नियमानुसार हुई है, तो उसकी सार्वजनिक विज्ञप्ति (टेंडर) कब और किस समाचार पत्र में निकाली गई?नीलामी की तारीख क्या थी और इसमें कौन-कौन से ठेकेदार शामिल हुए?कीमती लकड़ी को कुल कितनी राशि में बेचा गया और क्या वह धनराशि सरकारी राजस्व खाते में जमा की गई है?इन बुनियादी और जरूरी सवालों का जवाब ब्लॉक प्रशासन की ओर से अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे संदेह की सुई अधिकारियों की तरफ घूम रही है।ब्लॉक से जुड़े विश्वस्त सूत्रों का कहना है कि नगवां ब्लॉक परिसर में यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी परिसर में खड़े कीमती शीशम के पेड़ों की लकड़ी को अवैध रूप से बेचे जाने की सुगबुगाहट तेज हुई थी। लेकिन उस मामले को भी रसूख और सांठगांठ के बल पर ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई। बार-बार सरकारी लकड़ियों के इस तरह गायब होने या बेचे जाने की घटनाओं ने शासन-प्रशासन की साख पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है।किसी भी सरकारी परिसर में गिरे या सूखे पेड़ों की बिक्री के लिए वन विभाग से मूल्यांकन (Valuation) कराया जाता है। इसके बाद बकायदा सार्वजनिक टेंडर या खुली नीलामी बुलाई जाती है, ताकि सरकार को अधिकतम राजस्व मिल सके। बिना इसके लकड़ी बेचना वित्तीय अनियमितता और दंडात्मक अपराध की श्रेणी में आता है।जब इस पूरे गंभीर प्रकरण को लेकर खंड विकास अधिकारी (BDO) अनिल सिंह से सीधा संपर्क किया गया, तो उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। बीडीओ ने सफाई देते हुए कहा कि पेड़ों की बिक्री में कोई अनियमितता नहीं हुई है। पूरी प्रक्रिया नियमानुसार और पारदर्शी तरीके से शासकीय गाइडलाइंस के तहत नीलामी कराकर ही पूरी की गई है। हालांकि, इस नीलामी से जुड़े दस्तावेज अभी तक सार्वजनिक मंचों पर सामने नहीं आए हैं।क्षेत्रीय जनता और समाजसेवियों का कहना है कि सरकारी संपत्तियां जनता की अमानत होती हैं। यदि खंड विकास अधिकारी का दावा सही है, तो प्रशासन को नीलामी से जुड़े सभी अभिलेख, रसीदें और सरकारी खाते में जमा रकम का विवरण सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर कोई निष्पक्ष जांच कराता है या फिर हर बार की तरह इस बार भी सरकारी संपत्ति के इस बड़े मामले को फाइलों में दबा दिया जाएगा।
भ्रष्टाचार की बू! नगवां ब्लॉक परिसर में गिरे पेड़ों की बिक्री पर उठे सवाल, बिना नीलामी लकड़ी बेचने का गंभीर आरोप
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