रेणुकूट, सोनभद्र। इतिहास के पन्ने गवाह हैं कि जब-जब समाज में अन्याय की जड़ें गहरी हुई हैं, तब-तब किसी न किसी रक्षक ने जन्म लेकर व्यवस्था को चुनौती दी है। आज रेणुकूट की इस औद्योगिक नगरी में यह कहावत अक्षरश सच साबित हो रही है। दैनिक कुरुक्षेत्र के माध्यम से अपनी निडरता और वीरता के लिए शहंशाह की उपाधि पाने वाले डब्लू सिंह एक बार फिर जनसेवा की मशाल थामे मैदान में उतर चुके हैं। डब्लू सिंह का स्पष्ट मानना है कि किसी भी बड़े परिवर्तन की नींव विश्वास पर टिकी होती है। हाल ही में जनता के बीच अपनी बात रखते हुए उन्होंने भावुक स्वर में कहा विश्वास संबंधों का आधार है। आप मेरा साथ दीजिए, आपका यही साथ मेरा हौसला बढ़ाएगा और मैं आपके हक की लड़ाई में चट्टान की तरह खड़ा रहूँगा। यह केवल शब्द नहीं हैं, बल्कि उन हजारों मजदूरों और वंचितों के प्रति एक अटूट प्रतिज्ञा है, जो लंबे समय से एक सच्चे नेतृत्व की तलाश में थे। रेणुकूट के गलियारों में डब्लू सिंह की पहचान केवल एक कड़क जननेता की नहीं, बल्कि एक बेहद संवेदनशील इंसान के रूप में भी है। उनकी करुणा की परिधि केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, वे घायल और बेसहारा जानवरों की सेवा के लिए उसी तत्परता से खड़े रहते हैं जैसे किसी इंसान के लिए। स्थानीय निवासियों के अनुसार, सेवा का ऐसा निस्वार्थ समर्पण क्षेत्र में विरल है, जहाँ कोई व्यक्ति अपने हितों को त्याग कर बेजुबानों की पीड़ा हरने के लिए किसी भी हद तक चला जाए। विजय प्रताप सिंह उर्फ डब्लू सिंह के लिए संघर्ष नया नहीं है, यह उन्हें विरासत में मिला है। उनके भाइयों ने जिस तरह कड़ाके की ठंड और तपती धूप की परवाह किए बिना सड़कों पर उतरकर, अनशन और धरनों के माध्यम से हुकूमत को झुकने पर मजबूर किया और मजदूरों को उनका हक दिलवाया, डब्लू सिंह आज उसी मशाल को आगे बढ़ा रहे हैं। शासन और प्रशासन के सामने मजदूरों की समस्याओं को निडरता से रखना और समाधान तक डटे रहना उनकी कार्यशैली की मुख्य पहचान बन चुकी है।आज रेणुकूट की जनता डब्लू सिंह के रूप में अपना वही पुराना शहंशाह वापस देख रही है। एक ऐसा नायक जो न केवल उनकी आवाज बनता है, बल्कि उनके भविष्य को सुरक्षित करने का साहस भी रखता है। डब्लू सिंह का आह्वान साफ है। यदि जनता और नेतृत्व के बीच विश्वास का पुल मजबूत हो, तो दुनिया की कोई भी ताकत गरीबों का हक नहीं दबा सकती।जब आप साथ खड़े होते हैं, तो लड़ने वाले का हौसला दोगुना हो जाता है। आपका एक विश्वास ही रेणुकूट की दशा और दिशा बदल सकता है।

