नगवा/सोनभद्र (20 जुलाई 2026)। विकास खंड नगवा के खलियारी स्थित पंडित जगमोहन विद्यालय परिसर में रविवार को एक्शनएड के सहयोग से अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 पर एक दिवसीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य वनांचल में निवास करने वाले आदिवासियों और परंपरागत वन निवासियों को उनके कानूनी अधिकारों, वनाधिकार दावा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया तथा ग्राम सभा की शक्ति व भूमिका से अवगत कराना रहा। कार्यक्रम में क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए आदिवासी महिला-पुरुषों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मुख्य प्रशिक्षक व मानवाधिकार रक्षक कमलेश कुमार ने वनाधिकार अधिनियम, 2006 की प्रमुख धाराओं, व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार (IFR & CFR) तथा सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों पर विस्तार से प्रकाश डाला।
कमलेश कुमार (मानवाधिकार रक्षक) का वक्तव्य वनाधिकार कानून सदियों से जंगलों में रह रहे आदिवासी समुदाय के ऐतिहासिक अन्यायों को दूर कर उन्हें मालिकाना हक व सम्मान देने वाला कानून है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए समुदाय की जागरूकता और ग्राम सभा का सशक्त व सक्रिय होना बेहद जरूरी है। प्रशिक्षण के दौरान तौहीद अली ने कानून के व्यावहारिक पहलुओं को रेखांकित करते हुए कहा कि वनाधिकार केवल जमीन का टुकड़ा हासिल करना नहीं है, बल्कि यह आदिवासियों की आजीविका, जल-जंगल-जमीन के संरक्षण और सांस्कृतिक स्वाभिमान से जुड़ा विषय है। कार्यक्रम में मौजूद सोनभद्र मनरेगा लेखपाल ने ग्रामीणों को मनरेगा व अन्य विकास योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वनाधिकार पट्टा प्राप्त परिवार इन योजनाओं से जुड़कर अपनी कृषि, सिंचाई व आजीविका को और अधिक सुदृढ़ बना सकते हैं। ग्राम प्रधान भुनेश्वर जी ने अपने संबोधन में कहा कि वनाधिकार कानून को लागू करने में ‘ग्राम सभा’ सबसे प्राथमिक और शक्तिशाली इकाई है। ग्रामीणों को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होकर ग्राम सभा की बैठकों में अनिवार्य रूप से भाग लेना चाहिए। सामाजिक कार्यकर्ता शिवाकांत ने कहा कि कागजी प्रक्रियाओं को पूरा करने और शासन से मालिकाना हक प्राप्त करने के लिए आदिवासी समाज को अपने संगठन को मजबूत बनाना होगा। कार्यक्रम के समापन सत्र में उपस्थित सभी प्रतिभागियों और ग्रामीणों ने वनाधिकार अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन और क्षेत्र के प्रत्येक पात्र वनवासी परिवार को उसका वाजिब हक दिलाने के लिए एकजुट होकर कार्य करने का सामूहिक संकल्प लिया।इस दौरान आदिवासी विकास संगठन के समर्पित कार्यकर्ता फूलमती, गुलाबी, गुजराती, राजमती, पांचू खरवार, विमलेश सहित सैकड़ों की संख्या में वनांचल से आए ग्रामीण और महिला-पुरुष उपस्थित रहे।
वनाधिकार अधिनियम-2006 पर एक्शनएड द्वारा प्रशिक्षण आयोजित अधिकारों के प्रति जागरूक होने का आह्वान
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