सोनभद्र अजीत प्रताप सिंह। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के आदेशानुसार एवं माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सोनभद्र राम सुलीन सिंह के कुशल मार्गदर्शन में आगामी 12 सितंबर 2026 को जनपद में भव्य राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिकाधिक वादों के निस्तारण और पूर्व-तैयारियों को अंतिम रूप देने के उद्देश्य से शुक्रवार (14 अगस्त 2026) को सायं 3:00 बजे जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री राहुल (सिविल जज वरिष्ठ प्रभाग) के विश्राम कक्ष में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक संपन्न हुई।
आयोजित बैठक में नगर पालिका परिषद राबर्ट्सगंज के अधिशासी अधिकारी सहित जनपद की समस्त नगर पंचायतों—घोरावल, चुर्क, चोपन, डाला, ओबरा, दुद्धी, रेनुकूट, अनपरा तथा पिपरी के अधिशासी अधिकारियों को आमंत्रित किया गया था। बैठक में मुख्य रूप से नगर पंचायत डाला, चोपन, रेनुकूट, ओबरा एवं पिपरी के अधिशासी अधिकारी उपस्थित रहे।बैठक के दौरान सचिव श्री राहुल ने उपस्थित अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी करते हुए कहा 12 सितंबर 2026 को आयोजित होने वाली राष्ट्रीय लोक अदालत में अधिक से अधिक पक्षकारों तक नोटिस का तामीला समय से सुनिश्चित कराया जाए। न्यायालयों में लंबित मामलों के साथ-साथ सुलह-योग्य प्री-लिटिगेशन (मामला अदालत पहुंचने से पहले) स्तर पर ही मुकदमों का आपसी सहमति व सुलह-समझौते के आधार पर निस्तारण कराना सुनिश्चित करें। 12 सितंबर को आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत में आम जनता एवं वादकारियों की सुविधा के लिए विभिन्न प्रकार के सिविल व आपराधिक मामलों को निस्तारित किया जाएगा। आपराधिक शमनीय वाद (सुलह योग्य), धारा-138 एन.आई. एक्ट (चेक बाउंस), आर्बिट्रेशन वाद, पेट्टी ऑफेंस (छोटे-मोटे अपराध)। बैंक वसूली वाद, श्रम विवाद, सर्विस में वेतन व भत्तों से संबंधित तथा सेवानिवृत्ति परिलाभों से जुड़े मामले। विद्युत एवं जल बिल विवाद (अशमनीय मामलों को छोड़कर), भूमि अधिग्रहण वाद, राजस्व वाद (केवल हाईकोर्ट व जिला अदालतों में लंबित)। मोटर दुर्घटना प्रतिकर (MACC) याचिकाएं, पारिवारिक व वैवाहिक विवाद, किराया, सुखाधिकार व विशिष्ट अनुतोष से जुड़े सिविल वाद। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव (पूर्णकालिक) श्री राहुल ने बताया कि राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य जनता को सुलभ, त्वरित और सस्ता न्याय दिलाना है। इसमें सुलह-समझौते के माध्यम से निस्तारित मामलों में कोर्ट फीस वापस हो जाती है और दोनों पक्षकारों के बीच मनमुटाव हमेशा के लिए खत्म हो जाता है। उन्होंने जनपदवासियों से अपने लंबित मामलों को लोक अदालत के माध्यम से निस्तारित कराने का आह्वान किया है।


