ओबरा (सोनभद्र)।उत्तर प्रदेश की दूसरी सबसे बड़ी नगर पंचायत और देश की ऊर्जा की राजधानी कहे जाने वाले ओबरा क्षेत्र में आम जनता की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के दावों की धज्जियां उड़ती नजर आ रही हैं। ओबरा के सबसे संवेदनशील, व्यस्ततम और प्रमुख केंद्र शारदा मंदिर चौराहे (वार्ड नंबर 3) पर जनता की सुरक्षा के लिए लाखों रुपये की सरकारी लागत से बनाया गया पुलिस सहायता केंद्र पिछले कई सालों से लगातार ताले में बंद पड़ा है। चारों तरफ से आने-जाने वाले रास्तों पर कड़ी नजर रखने और त्वरित पुलिस सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित यह केंद्र आज खुद पुलिसिया उदासीनता के कारण एक बेजान डिब्बा बनकर रह गया है।
यह पूरा मामला इसलिए बेहद गंभीर और चिंताजनक है क्योंकि शारदा मंदिर चौराहा ओबरा का वह मुख्य नाका (लाइफलाइन) है, जहां से होकर ओबरा तहसील कार्यालय, राजकीय डिग्री कॉलेज, आईटीआई स्कूल, किड्स केयर स्कूल और सीधे ओबरा थर्मल पावर परियोजना क्षेत्र को जोड़ने वाला मार्ग गुजरता है। इस व्यस्ततम मार्ग से प्रतिदिन हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं, राहगीर, ग्रामवासी और शहर के संभ्रांत नागरिक गुजरते हैं।
सुबह से लेकर देर शाम तक इस चौराहे पर भारी चहल-पहल रहती है। सुरक्षा के लिहाज से अति-संवेदनशील होने के बावजूद यहां स्थापित सहायता केंद्र पर ताला लटके रहना और किसी भी सुरक्षाकर्मी की तैनाती न होना, स्थानीय पुलिस और सुरक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। स्थानीय दुकानदारों, व्यापारियों और आसपास के निवासियों ने ग्राउंड जीरो पर अपना दर्द बयां करते हुए कहा कि इस पुलिस सहायता केंद्र की स्थापना इसलिए की गई थी ताकि चौराहे के चारों तरफ पैनी नजर रखी जा सके। क्षेत्र में होने वाली चोरी, छिनैती, डकैती, मादक पदार्थों की अवैध स्मगलिंग और विशेषकर कॉलेज आने-जाने वाली छात्राओं से होने वाली छेड़खानी जैसी अवांछनीय गतिविधियों पर तत्काल अंकुश लगाया जा सके। इसके अलावा, इस व्यस्त मोड़ पर यातायात व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए यहां ट्रैफिक पुलिस कर्मियों की तैनाती होनी तय हुई थी। लेकिन धरातल पर कड़वी सच्चाई यह है कि आज न तो यहां कोई ट्रैफिक पुलिस का जवान बैठता है और न ही स्थानीय थाने का कोई सिपाही ड्यूटी पर दिखाई देता है। सालों से बंद पड़े इस सहायता केंद्र को लेकर अब ओबरा की जनता के सब्र का बांध टूट रहा है। स्थानीय नागरिकों ने सीधे खाकी और जिम्मेदार अधिकारियों के सामने तीन तीखे सवाल दागे हैं। यदि इस सहायता केंद्र को ताले में ही बंद रखना था और यहाँ किसी पुलिसकर्मी को बैठना ही नहीं था, तो जनता के टैक्स की गाढ़ी कमाई के लाखों रुपये फूंककर इस इमारत को खड़ा क्यों किया गया। इसका ईमानदार जिम्मेदार कौन है।डिग्री कॉलेज और स्कूली बच्चों के मुख्य आवागमन मार्ग पर सुरक्षा केंद्र को निष्क्रिय रखकर क्या पुलिस अनजाने में मनचलों, उचक्कों और शातिर अपराधियों के हौसले बुलंद नहीं कर रही है। जब शहर के सबसे प्रमुख चौराहे का पुलिस सहायता केंद्र ही रामभरोसे छोड़ दिया गया है, तो ओबरा पुलिस की 24 घंटे चौकस रहने वाली गश्त और कानून व्यवस्था के दावों में आखिर कितना दम है?
ओबरा के स्थानीय व्यापार मंडल, संभ्रांत नागरिकों, युवाओं और राहगीरों ने पुलिस अधीक्षक (SP) सोनभद्र और क्षेत्राधिकारी (CO) ओबरा का ध्यान इस गंभीर और संवेदनशील विषय की ओर आकृष्ट कराया है। जनता ने पुरजोर मांग की है कि शारदा मंदिर चौराहे जैसे व्यस्ततम स्थल पर सुरक्षा का माहौल पैदा करने और सुगम यातायात सुनिश्चित करने के लिए इस बंद पड़े पुलिस सहायता केंद्र को तत्काल प्रभाव से चालू किया जाए। यहाँ नियमित रूप से पुलिसकर्मियों व ट्रैफिक पुलिस की शिफ्टवार ड्यूटी सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी अनहोनी या बड़ी आपराधिक वारदात को समय रहते रोका जा सके और जनता खुद को सुरक्षित महसूस कर सके।
ओबरा सुरक्षा दावों की खुली पोल, शारदा मंदिर चौराहे पर सालों से धूल फांक रहा लाखों का पुलिस सहायता केंद्र
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