भांवरकोल (गाज़ीपुर) दृष्टि उजागर 16 जुलाई
भीषण गर्मी और लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मौसम मेहरबान हो गया है। क्षेत्र में आज सुबह से हो रही झमाझम बारिश के बाद किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। सूखे पड़े खेतों में पानी भरते ही भांवरकोल और आस-पास के ग्रामीण इलाकों में धान की रोपनी का काम पूरी रफ्तार से शुरू हो गया है।
खेतों में लौटी रौनक, सुबह से शाम तक जुटे किसान
मौसम के बदलते ही भांवरकोल क्षेत्र के अमवा, शेरपुर, मछटी, सुकडेहरी बाॅठा कनुवान सहित तमाम गांवों के सिवानों (खेतों) में रौनक लौट आई है। किसान, महिलाएं और मजदूर सुबह की पहली किरण के साथ ही खेतों में उतर जा रहे हैं। कहीं ट्रैक्टरों से खेतों को समतल (कदो करना) किया जा रहा है, तो कहीं पारंपरिक गानों के बीच महिलाएं बड़े उत्साह से धान के पौधों की रोपाई कर रही हैं।
महंगे डीजल और सूखे की चिंता से मिली राहत
स्थानीय किसानों का कहना है कि इस बारिश से उन्हें बहुत बड़ी राहत मिली है।
“अगर दो-चार दिन और बारिश न होती, तो धान की नर्सरी (बेहन) खेतों में ही सूख जाती। पंपिंग सेट चलाकर सिंचाई करना बहुत महंगा पड़ रहा था, जिससे लागत बढ़ रही थी। इस प्राकृतिक बारिश ने हमारी आधी चिंता दूर कर दी है।”
पारस पांडे ने कहा
मजदूरों की मांग बढ़ी
धान की रोपनी एक साथ जोर-शोर से शुरू होने के कारण क्षेत्र में कृषि मजदूरों की मांग अचानक बहुत बढ़ गई है। समय पर रोपाई पूरी करने के लिए किसान परिवारों के सभी सदस्य खुद भी खेतों में हाथ बंटा रहे हैं।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह बारिश धान की फसल के लिए अमृत के समान है। यदि आने वाले दिनों में भी मौसम ऐसा ही रहा, तो इस बार भांवरकोल क्षेत्र में धान की बंपर पैदावार होने की उम्मीद है।
झमाझम बारिश से खिले किसानों के चेहरे, भांवरकोल क्षेत्र में धान की रोपनी ने पकड़ी रफ्तार
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