वॉइस इंडिया न्यूज संवाददाता रीना राय
ओबरा, सोनभद्र (उत्तर प्रदेश)
माँ विंध्यवासिनी विश्वविद्यालय, मिर्ज़ापुर से संबद्ध राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, ओबरा में आज “नशा मुक्ति भारत अभियान” के तहत एक विशेष जागरूकता सत्र का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य ध्येय “जागरूक युवा | स्वस्थ समाज | समृद्ध राष्ट्र” रहा।
प्राचार्य प्रो. प्रमोद कुमार ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में कहा कि नशा केवल एक व्यक्ति की व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज, परिवार और हमारे देश के भविष्य के लिए एक गंभीर खतरा है। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि हमें नशा मुक्त जीवन अपनाकर एक स्वस्थ और सफल भविष्य का निर्माण करना चाहिए। प्रो. कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि देश के युवाओं की यह नैतिक जिम्मेदारी है कि वे समाज को नशामुक्त बनाने में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं और “नशा छोड़ो, जिंदगी चुनो” के संदेश को जन-जन तक पहुँचाएं। डॉ. वैशाली शुक्ला ने नशे के दुष्प्रभाव – स्वास्थ्य, परिवार और समाज पर इसके व्यापक प्रभाव पर प्रकाश डाला। डॉ. संघमित्रा ने कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में कहा कि युवा वर्ग राष्ट्र की रीढ़ है, और आज का युवा यदि नशे की गिरफ्त में आ जाए तो वह व्यक्तिगत बर्बादी के साथ-साथ पूरे देश की प्रगति को रोक देता है। उन्होंने पारिवारिक संवाद और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष जोर देते हुए कहा कि बच्चों और युवाओं में निराशा या तनाव को दूर करने के लिए सकारात्मक माहौल और काउंसिलिंग की अत्यधिक आवश्यकता होती है, ताकि वे किसी भी प्रकार के व्यसन से दूर रहें। श्रीमती अंजलि मिश्रा ने अपने वक्तव्य में समाज और विशेषकर महिलाओं व परिवारों पर नशे के दुष्प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एक घर का मुखिया या युवा जब नशे की चपेट में आता है, तो पूरा परिवार आर्थिक और मानसिक संकट से जूझता है। उन्होंने महिलाओं और माताओं से अपील की कि वे अपने बच्चों की संगति पर विशेष ध्यान दें और समाज में जागरूकता फैलाने की इस मुहिम में आगे आएं।यह कार्यक्रम पूर्वाह्न 11:00 बजे आयोजित किया गया, जिसमें महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं और प्राध्यापकों ने भारी संख्या में भाग लिया।

