सोनभद्र- (15 जुलाई 2026)। नगर पालिका परिषद रॉबर्ट्सगंज में हर साल मानसून के दौरान होने वाली भीषण जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान ढूंढ लिया गया है। जिलाधिकारी चर्चित गौड़ की विशेष पहल पर जिले के डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (डीएमएफ) फंड से 23.62 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले 4.46 किलोमीटर लंबे आरसीसी (RCC) नाला निर्माण को वित्तीय स्वीकृति प्रदान कर दी गई है। इस ऐतिहासिक फैसले से दशकों पुरानी ड्रेनेज समस्या से नगरवासियों को हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। विगत दिनों जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने स्वयं ग्राउंड जीरो पर जाकर जलभराव से सबसे ज्यादा प्रभावित रहने वाली इमरती कॉलोनी और उसके आस-पास के इलाकों का सघन निरीक्षण किया था। इस दौरान स्थानीय नागरिकों ने इमरती कॉलोनी हाईवे के सामने, पुसौली, बढ़ौली चौराहे और मिशन अस्पताल के सामने होने वाले भारी जलभराव और उससे उत्पन्न नारकीय स्थिति से उन्हें अवगत कराया था। जनता की इस गंभीर समस्या को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल जल जीवन मिशन (शहरी) के अभियंतों व तकनीकी अधिकारियों की एक विशेष टीम गठित कर वैज्ञानिक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी के निर्देश पर नगर के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी आधार पर ड्रेनेज नेटवर्क विकसित करने के उद्देश्य से एक विस्तृत फीजिबिलिटी स्टडी और ड्रेनेज डिजाइन तैयार कराया गया। इस तकनीकी अध्ययन में भू-स्तर (लेवल सर्वे), हाइड्रोलॉजी और कंटूर मैप तैयार किया गया। आधुनिक सैटेलाइट सर्वे का सहारा लिया गया। विगत 30 वर्षों के वर्षा के आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया गया ताकि भविष्य में अत्यधिक बारिश होने पर भी नाला ओवरफ्लो न हो। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने नगर क्षेत्र से पानी निकासी के लिए तीन संभावित ड्रेनेज मार्गों का गहन परीक्षण किया तकनीकी रूप से पूरी तरह असंभव पाया गया। इस मार्ग पर आगे बढ़ने के साथ ही भूमि का स्तर ऊंचा (चढ़ाई) होता जाता है, जिससे गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत पर पानी का बहना मुमकिन नहीं था। इसके लिए खर्चीले पंपिंग सिस्टम की जरूरत पड़ती। रेलवे लाइन पार करने के बाद आगे पानी की निकासी के लिए कोई प्राकृतिक जल स्रोत (आउटफॉल) उपलब्ध नहीं मिला, जिससे इस विकल्प को भी खारिज कर दिया गया। यह मार्ग तकनीकी रूप से सर्वाधिक उपयुक्त और व्यावहारिक पाया गया। इस रूट पर भूमि का प्राकृतिक ढाल लगातार नीचे की ओर है, जिससे बिना किसी भारी पंपिंग मशीन के वर्षा का जल प्राकृतिक रूप से बहेगा। यह पानी कचहरी ड्रेन होते हुए सजौर पोखरा के समीप स्थित मुख्य सिंचाई नाले में जाकर गिरेगा। प्रस्तावित ड्रेनेज परियोजना की कुल लंबाई लगभग 4,461 मीटर (4.46 किलोमीटर) होगी। मूल निर्माण लागत लगभग ₹17.95 करोड़ है। कुल अनुमानित लागत डिजाइन व वेटिंग शुल्क, श्रम उपकर, जीएसटी (GST) तथा अन्य प्रभारों को मिलाकर कुल बजट ₹23.62 करोड़ निर्धारित किया गया है।
इस परियोजना के तहत विभिन्न आकार की विशाल आरसीसी (RCC) नालियों का निर्माण, आवश्यक कल्वर्ट (पुलिया), रेलवे एवं नहर क्रॉसिंग, साइफन निर्माण के साथ-साथ मार्ग में आने वाले विद्युत पोल, ट्रांसफार्मर शिफ्टिंग और पेयजल पाइपलाइनों के स्थानांतरण जैसे सभी आवश्यक बुनियादी कार्य एक साथ किए जाएंगे। रॉबर्ट्सगंज नगरवासियों को जलभराव के संकट से स्थायी राहत दिलाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। पूरी तरह वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन के आधार पर तैयार इस वृहद परियोजना को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जाएगा, जिससे आने वाले समय में रॉबर्ट्सगंज को एक सुदृढ़, आधुनिक और दीर्घकालिक जलनिकासी व्यवस्था मिल सके।चर्चित गौड़, जिलाधिकारी (सोनभद्र)
अब बरसात में पानी-पानी नहीं होगा रॉबर्ट्सगंज जलभराव से मुक्ति के लिए ₹23.62 करोड़ की लागत से बनेगा 4.46 किमी लंबा आधुनिक नाला
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