सोनभद्र जनपद के सुदूरवर्ती कोन क्षेत्र में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था और डॉक्टरों की भारी कमी को लेकर स्थानीय जनता के सब्र का बांध अब टूट गया है। क्षेत्र की स्वास्थ्य सुविधाओं को पटरी पर लाने और बुनियादी चिकित्सा अधिकारों की मांग को लेकर राष्ट्रीय नव निर्माण सेना ट्रस्ट के बैनर तले सोमवार को एक विशाल जनजागरूकता एवं हस्ताक्षर अभियान चलाया गया। ग्राम पंचायत पडरछ से शुरू हुए इस अभियान का नेतृत्व ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष आनन्द पटेल दयालु ने किया। आंदोलन के दौरान सैकड़ों ग्रामीणों ने गांव-गांव जाकर व्यवस्था के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की और स्थानीय सरकारी अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ व महिला डॉक्टर की तत्काल तैनाती की मांग की।अभियान के दौरान ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों का आक्रोश सातवें आसमान पर दिखा। वक्ताओं ने कहा कि लगभग 2 लाख की आबादी वाले इस विशाल क्षेत्र को आज तक एक अदद बेहतर अस्पताल नसीब नहीं हो सका। इसका सबसे बड़ा खामियाजा यहाँ के गरीब, किसान और दिहाड़ी मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है। हालत इतनी बदतर है कि किसी भी मामूली बीमारी, दुर्घटना या प्राथमिक इलाज के लिए मरीजों को यहाँ से करीब 70 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज रेफर कर दिया जाता है। इस लंबी दूरी को तय करने के चक्कर में कई बार समय पर इलाज न मिलने से गंभीर मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।एक गरीब आदमी बीमारी से बाद में मरता है, पहले वह इलाज के खर्च के बोझ से टूट जाता है। इस कमरतोड़ महंगाई में ₹400 दिहाड़ी कमाने वाला मजदूर जब ₹300 केवल गाड़ी का भाड़ा देकर राबर्ट्सगंज जिला अस्पताल जाएगा, तो वह अपने बच्चों का पेट कैसे पालेगा? यह स्थिति हमारे सिस्टम की संवेदनहीनता को दर्शाती है।उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि स्वास्थ्य सुविधाएं पाना जनता का संवैधानिक अधिकार है, कोई राजनीतिक एहसान नहीं। उन्होंने कहा, हम सरकार के विरोध में नहीं हैं, बल्कि प्रशासन को जगाने आए हैं। अधिकारी वातानुकूलित (AC) कमरों से बाहर निकलें और इस जमीनी हकीकत को देखें। अगर जल्द ही डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं हुई, तो इस आंदोलन को ब्लॉक से लेकर जिला मुख्यालय तक और उग्र किया जाएगा।आंदोलन को संबोधित करते हुए संगठन के प्रदेश अध्यक्ष जनाब महताब आलम ने कहा कि कोन क्षेत्र की जनता दशकों से प्रशासनिक उपेक्षा की शिकार रही है, लेकिन अब लोग अपने हक के लिए जाग चुके हैं और संगठित हो रहे हैं। वहीं, प्रदेश उपाध्यक्ष संतोष कनौजिया ने अस्पताल में महिला डॉक्टर (लेडी डॉक्टर) न होने का मुद्दा प्रखरता से उठाते हुए कहा, महिला डॉक्टर न होने से हमारी माताओं-बहनों को असहनीय पीड़ा और लोक-लाज के कारण भारी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। प्रसव (डिलीवरी) जैसे मामलों के लिए उन्हें दर-दर भटकना पड़ता है। यह केवल स्वास्थ्य का नहीं, बल्कि हमारी महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा का भी मुद्दा है।इस व्यापक हस्ताक्षर अभियान और जनजागरूकता कार्यक्रम में मुख्य रूप से संगठन के पदाधिकारी और स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग शामिल रहा।शिबू शेख (जिलाध्यक्ष) शंभू पटेल (जिला उपाध्यक्ष) नारद पटेल (जिला सचिव)
प्रमुख सहयोगी गुड्डू पटेल, चंद्रिका शर्मा, विजेंद्र पांडे, अखिलेश राय, राजकुमार कनौजिया।इस दौरान पडरछ और आस-पास के सैकड़ों ग्रामीणों, युवाओं और बुजुर्गों ने बढ़-चढ़कर हस्ताक्षर अभियान में हिस्सा लिया।अभियान के समापन पर ग्रामीणों और ट्रस्ट के कार्यकर्ताओं ने एक स्वर में हुंकार भरते हुए संकल्प लिया कि जब तक कोन अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों और पर्याप्त स्टाफ की स्थायी तैनाती नहीं हो जाती, तब तक यह जनआंदोलन रुकने वाला नहीं है। आने वाले दिनों में इसे और बड़े स्तर पर ले जाया जाएगा।
कोन क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर फूटा जनता का आक्रोश 2 लाख की आबादी, लेकिन अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं — आनंद पटेल दयालु
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