किन्नर समाज में उच्च न्यायालय के निर्णय पर असंतोष, महामंडलेश्वर किरन नंदगिरि ने दी सर्वोच्च न्यायालय जाने की चेतावनी
जिला संवादाता अजीत प्रताप सिंह
सोनभद्र | 01 मई, 2026माननीय उच्च न्यायालय द्वारा हाल ही में दिए गए एक निर्णय को लेकर सोनभद्र के किन्नर समाज में गहरा रोष और असंतोष व्याप्त है। विश्व हिंदू महासंघ (उत्तर प्रदेश) किन्नर प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष और सनातनी किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर किरन नंदगिरि ने इस मामले पर अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया है।
महामंडलेश्वर किरन नंदगिरि ने कहा कि न्यायालय के समक्ष समाज की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं हो पाई। उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि उचित कानूनी प्रतिनिधित्व और साक्ष्यों के अभाव में किन्नर समुदाय का पक्ष सही ढंग से प्रस्तुत नहीं हो सका, जिसके कारण यह निर्णय आया है। किन्नर समुदाय ने निर्णय के कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए स्पष्ट किया कि वे किसी प्रकार की जबरन वसूली नहीं करते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि प्राचीन काल से ही खुशी के अवसरों (जैसे जन्मोत्सव, विवाह) पर नेग लेना उनकी सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा रहा है। समाज ने यह भी स्वीकार किया कि हर समुदाय की तरह उनके यहाँ भी कुछ असामाजिक तत्व हो सकते हैं, लेकिन चंद लोगों की गलतियों के आधार पर पूरे समुदाय को अपराधी या गलत ठहराना न्यायसंगत नहीं है। किरण नंदगिरि ने याद दिलाया कि किन्नर समाज का अस्तित्व पौराणिक काल से है और हमारे धार्मिक ग्रंथों में भी उनका उल्लेख अत्यंत सम्मानपूर्वक मिलता है। उन्होंने कहा कि उनकी परंपराएं केवल जीविकोपार्जन का साधन नहीं, बल्कि जनमानस की आस्था और सामाजिक मान्यताओं से जुड़ी हुई हैं। किन्नर समाज का मानना है कि वर्तमान निर्णय उनके अस्तित्व और सदियों पुरानी परंपराओं को गलत रूप में परिभाषित करता है। इसी के मद्देनजर समुदाय अब इस निर्णय को उच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है।
समाज के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और कानूनी विशेषज्ञों के साथ विमर्श शुरू कर दिया गया है।अंत में, किन्नर समाज ने आम जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि समुदाय आज भी सामाजिक और आर्थिक रूप से मुख्यधारा से पिछड़ा हुआ है। ऐसे में समाज को उनके प्रति सम्मान और सहयोग का भाव बनाए रखना चाहिए, ताकि वे गरिमा के साथ अपना जीवन यापन कर सकें।

