(गाजीपुर)। इबादत, सब्र, कुर्बानी और गम के महीने माहे मोहर्रम में शुक्रवार को यूसुफपुर और मुहम्मदाबाद नगर क्षेत्र पूरी तरह इमामे हुसैन की याद में डूबा नजर आया। नगर की गलियों, सड़कों और चौक-चौराहों पर “या हुसैन” और “सलाम इब्ने हैदर पे लाखों सलाम” की सदाएं गूंजती रहीं। हर ओर गम का माहौल था और अकीदतमंद अश्कबार आंखों से कर्बला के शहीदों को याद करते दिखाई दिए।
यूसुफपुर फाटक, लाठी मोड़ तथा मुहम्मदाबाद के जफरपुरा, जामा मस्जिद, सदर रोड, अग्रवाल टोली और पोखरा मोहल्ला समेत विभिन्न क्षेत्रों से हजरत इमाम हसन और हजरत इमाम हुसैन की याद में ताजिया जुलूस पूरे अदब, एहतराम और अकीदत के साथ निकाले गए। आकर्षक सजावट से सजे ताजिए लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे।
यूसुफपुर के लाठी मोड़ पर उस समय भावुक दृश्य देखने को मिला जब लगभग 35 से 40 ताजिए एक साथ उठे और पारंपरिक लाठी मिलनी की रस्म अदा की गई। हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने इस नजारे को देखा और “या हुसैन” की सदाओं से पूरा इलाका गूंज उठा।
जुलूस के दौरान विभिन्न मातमी अंजुमनों ने नौहाखानी और मर्सियाखानी पेश कर कर्बला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन और उनके साथियों की शहादत को याद किया। दर्दभरे नौहे सुनकर कई अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। “हाय हुसैन” की सदाओं के बीच मातम का सिलसिला लगातार जारी रहा।
नगर के विभिन्न स्थानों पर पारंपरिक लकड़ी का खेल, बनेटी और अन्य करतबों का भी प्रदर्शन किया गया। युवाओं ने अपनी कला का प्रदर्शन कर लोगों का ध्यान आकर्षित किया। वहीं मातमी अकीदतमंदों द्वारा जंजीर का मातम और आग पर चलकर किए गए मातम के दृश्य अत्यंत मार्मिक रहे।
देर रात तक ताजिया जुलूस अपने निर्धारित मार्गों से गुजरते हुए कर्बला की ओर रवाना हुए। रास्ते भर विभिन्न समुदायों के लोगों ने ताजियों और अकीदतमंदों का स्वागत किया। जगह-जगह पानी, शर्बत और अन्य सेवाओं की व्यवस्था कर गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की गई।
कर्बला पहुंचने के बाद नौहा, सलाम, मातम और फातिहा का सिलसिला देर रात तक चलता रहा। अकीदतमंदों ने नम आंखों से इमामे हुसैन की शहादत को याद करते हुए उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
मोहर्रम के इस मातमी जुलूस के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार भ्रमण कर स्थिति पर नजर बनाए रहे। संवेदनशील स्थलों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा और पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया गया।
माहे मोहर्रम का यह मातमी जुलूस एक बार फिर कर्बला के शहीदों की कुर्बानी, सब्र, इंसाफ, सच्चाई और इंसानियत के पैगाम को जीवंत करता नजर आया।
हुसैन की सदाओं से गूंजा यूसुफपुर-मुहम्मदाबाद, 40 ताजियों की लाठी मिलनी ने किया भावुक
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